प्रतीकात्म फोटो (सोर्स - सोशल मीडिया 
राजस्थान

राजस्थान के बीकानेर में पूजा खेडकर जैसे ही दिव्यांग, 40 प्रतिशत विकलांगता का फर्जी सर्टिफिकेट लगा कर रहे नौकरी

Rajasthan News: बीकानेर में तीन शिक्षकों ने दिव्यांगता का नकली सर्टिफिकेट बनाकर फर्जी तरीके से नौकरी हासिल की, इस मामले का खुलासा शिक्षकों के दोस्तो ने ही शिकायत करने के बाद किया है।

सौरभ शर्मा

जयपुर: राजस्थान के बीकानेर जिले से एक पूजा खेडकर की तरह ही मामला सामने आया है, जहां पर तीन प्रोफेसर देशराज, हरिश्चंद्र और राजकुमार ने नकली कैंडिडेट के जरिए से दिव्यांगता का सर्टिफिकेट प्राप्त करने का आरोप लगा है। मामले की जांच एसओजी के द्वारा करवाई जा रही है, और प्रथम दृष्टया साक्ष्यों के आधार पर सभी शिक्षकों को जयपुर स्थित सवाई मानसिंह हॉस्पिटल के मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के लिए निर्देशित किया है। इस मामले का खुलासा भी तीनों शिक्षक के दोस्तों ने ही किया था, इस मामले को एसओजी में शिकायत करने के बाद खुद शिक्षकों के ही दोस्तो ने ही खुलास कर दिया था।

सभी शिक्षकों की मेडिकल जांच के बाद रिपोर्ट को सभी संबंधित विभागों को भेजा जाएगा। इस फर्जी कलाकारी की सूचना संयुक्त निदेशक शिक्षा विभाग को भेजी जाएगी। अभी प्रथम दृष्टया जांच में सामने आ रहा है कि ये तीनों शिक्षक स्कूल में लगातार पढ़ा रहे हैं और शारीरिक रूप से पूरी तरह से स्वस्थ लग रहे हैं। शिक्षकों के चलने-फिरने और बोर्ड पर लिखने में भी किसी तरह की कोई परेशानी नहीं देखी जा सकती है, बता दें कि अभी तक की उपलब्ध जानकारी के हिसाब से तीनों शिक्षक कार को भी चला लेते हैं। इन सभी के बावजूद तीनो अध्यपकों ने अपने प्रमाण पत्रों में 40% दिव्यांगता दर्शाई थी।

मामला जयपुर के SMS हॉस्पिटल में

जवाहरलाल नेहरू हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉक्टर अरविंद खरे ने बताया है कि सभी शिक्षकों की नेत्र रोग विशेषज्ञों के माध्यम से उनकी जांच करवाई गई है जिससे इनकी दृष्टि संबंधी हर प्रकार की समस्या को समझ लिया जायेगा। यह बात बहुत गंभीर हो जाती है कि 2024 में प्रायोजित प्राध्यापक भर्ती परीक्षा के समय आवेदन से लेकर डॉक्यूमेंट जांच तक इन्होंने अपने दिव्यांगता सर्टिफिकेट का इस्तमाल किया था। अब यदि जांच में यह पता चलता है कि इन शिक्षकों ने गलत तरीके से इस दिव्यांगता के प्रमाण पत्र को पाप्त किया है, तो इन सभी पर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया चलाई जाएगी। राजस्थान की अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें

नौकरी भी जा सकती है

इस सभी के अलावा शिक्षा विभाग द्वारा भी तीने शिक्षकों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई करी जा सकती है, जिसमें नौकरी से लेकर सस्पेंड हो या फिर बर्खास्तगी तक की पूरी संभावना है। राज्य की सरकार ने इस तरह के फर्जीवाड़े को लेकर सख्त मूड में है, अभी इस मामले की जांच जारी चल रही है, देखना होगा कि यदि दोष सिद्ध होने पर तीनों शिक्षकों को न्यायिक प्रक्रिया का कितना सामना करना पड़ सकता है, और कितने समय में इस मामले पर किस तरह का न्यायिक फैसला आता है।

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