SCORE Intelligence के सर्वे में AAP को 69–82 सीटें मिलने का अनुमान है।
सर्वे में मुख्यमंत्री भगवंत मान 39.36% समर्थन के साथ पहली पसंद बताए गए।
महिला मतदाताओं के बीच AAP को 51.2% समर्थन मिलने का अनुमान है।
Punjab Opinion Poll 2027: पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आए एक बड़े ओपिनियन पोल ने राज्य के सभी राजनीतिक दलों का ध्यान खींचने लगा है। SCORE Intelligence द्वारा जारी किए गए पहले दौर के सर्वे के मुताबिक, अगर आज पंजाब में चुनाव होते हैं, तो राज्य में एक बार फिर आम आदमी पार्टी की सरकार बनती दिखायी दे रही है। 117 सीटों वाली पंजाब विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 59 है, जबकि सर्वे में आम आदमी पार्टी को 69 से 82 सीटें मिलने का अनुमान जताया जा रहा है।
इस सर्वे से साफ संकेत मिलता है कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की कोशिशों के बावजूद आम आदमी पार्टी चुनावी रेस में सबसे आगे बनी हुई है। हालांकि, आंकड़े यह भी बताते हैं कि साल 2022 के मुकाबले पार्टी के प्रदर्शन में थोड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। फिर भी, विपक्षी वोटों का बिखराव और सरकारी योजनाओं की पहुंच AAP के लिए संजीवनी का काम कर रही है।
13 सितंबर से 14 अक्टूबर 2026 के बीच पंजाब की सभी 117 सीटों पर 28,347 मतदाताओं से बातचीत के आधार पर यह ओपिनियन पोल तैयार किया गया है। सर्वे के अनुसार, अगर 15 अक्टूबर 2026 को राज्य में मतदान होता, तो विभिन्न दलों को मिलने वाली संभावित सीटें और वोट शेयर कुछ इस तरह होते दिखायी दे रहे हैं...
आम आदमी पार्टी (AAP): 38% वोट शेयर के साथ 69 से 82 सीटें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC): 24% वोट शेयर के साथ 17 से 34 सीटें
भारतीय जनता पार्टी (BJP): 14% वोट शेयर के साथ 4 से 12 सीटें
शिरोमणि अकाली दल (SAD): 12.5% वोट शेयर के साथ 2 से 6 सीटें
अकाली दल (वारिस पंजाब दे) : 8.5% वोट शेयर के साथ 2 से 6 सीटें
साल 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने रिकॉर्ड 92 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। उस समय पार्टी को करीब 42% वोट मिले थे। मौजूदा ओपिनियन पोल में AAP का वोट शेयर घटकर 38% रहने का अनुमान लगाया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि पार्टी के वोट शेयर में करीब 4 प्रतिशत अंक की गिरावट आई है, जिससे सीटों की संख्या भी 92 से घटकर 69 से 82 के बीच आ सकती है।
इसके बावजूद, पार्टी के पास पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें मिलती दिख रही हैं। हालांकि, 2022 जैसी एकतरफा सुनामी इस बार दिखाई नहीं दे रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस 24% वोट शेयर के साथ दूसरे नंबर पर बनी हुई है। कांग्रेस के लिए सीटों का दायरा 17 से 34 रखा गया है, जो इस बात पर निर्भर करेगा कि पार्टी अंतिम समय में अपने समर्थकों को कितना एकजुट रख पाती है।
पंजाब के सियासी मैदान में आम आदमी पार्टी को सबसे बड़ा फायदा विरोधी दलों के बिखरे हुए वोट बैंक से मिल रहा है। सर्वे के मुताबिक, कांग्रेस को 24%, बीजेपी को 14%, शिअद को 12.5% और अमृतपाल सिंह के नेतृत्व वाले अकाली दल (वारिस पंजाब दे) को 8.5% वोट मिलने का अनुमान है। विरोधी दलों का यह अलग-अलग खेमों में बंट जाना AAP के लिए राह आसान बना रहा है।
विशेष रूप से, 'वारिस पंजाब दे' की मौजूदगी ने पारंपरिक शिरोमणि अकाली दल के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई है। 35 साल से कम उम्र के युवाओं और पुरुष मतदाताओं में वारिस पंजाब दे को 17 से 19% तक समर्थन मिल रहा है। इस वजह से अकाली दल का पारंपरिक जनाधार बंट गया है, जिसका सीधा फायदा चुनाव मैदान में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को मिलता हुआ साफ दिख रहा है।
भौगोलिक दृष्टि से देखें तो पंजाब के तीनों प्रमुख क्षेत्रों में...माझा, दोआब और मालवा में आम आदमी पार्टी बढ़त बनाए हुए है। दोआब क्षेत्र में AAP की स्थिति सबसे मजबूत मानी जा रही है, जहां उसे 43.9% वोट शेयर मिलने की संभावना है। वहीं, माझा क्षेत्र में पार्टी को 40.8% और मालवा क्षेत्र में 35.2% वोट शेयर मिल सकता है।
चुनावी राजनीति के लिहाज से मालवा सबसे अहम क्षेत्र माना जाता है, क्योंकि पंजाब की 117 में से अकेली 69 सीटें मालवा से ही आती हैं। सर्वे में पहचाने गए 16 बेहद कड़े और करीबी मुकाबले वाले क्षेत्रों में से 14 सीटें मालवा की ही हैं। ऐसे में मालवा का नतीजा ही यह तय करेगा कि AAP अपनी सीटों के अनुमानित दायरे में 69 के करीब ठहरती है या 82 के आंकड़े को छू पाती है।
SCORE के सर्वे में आम आदमी पार्टी की इस मजबूत स्थिति के पीछे महिला मतदाताओं की भूमिका सबसे अहम पाई गई है। राज्य में महिला मतदाताओं के बीच AAP को 51.2% का भारी-भरकम समर्थन मिलता दिख रहा है। इसके मुकाबले मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को महिलाओं का केवल 20.8% समर्थन ही हासिल हो पा रहा है।
इसके उलट, पुरुष मतदाताओं के मामले में लड़ाई बेहद करीबी है। पुरुषों के बीच AAP को 27.4% और कांग्रेस को 26.6% समर्थन मिलता दिख रहा है, जो लगभग बराबरी का मुकाबला है। इतना ही नहीं, 61 वर्ष से अधिक उम्र की वरिष्ठ महिला मतदाताओं में AAP को सबसे ज्यादा 57.8% समर्थन मिला है। महिलाओं का यह एकतरफा झुकाव पूरे राज्य में पार्टी के प्रदर्शन को मजबूत आधार दे रहा है।
नेतृत्व के चेहरे की बात करें तो मुख्यमंत्री भगवंत मान की निजी साख राज्य में काफी मजबूत बनी हुई है। सर्वे में 39.36% लोगों ने भगवंत मान को मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी पहली पसंद बताया है। कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी 18.3% समर्थन के साथ दूसरे स्थान पर हैं।
इसके अलावा, शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल को 12.3% और अमृतपाल सिंह को 8% लोगों ने मुख्यमंत्री के रूप में पसंद किया है। आंकड़ों से स्पष्ट है कि भगवंत मान अपने प्रतिद्वंदियों से काफी आगे चल रहे हैं। व्यक्तिगत रेटिंग के मामले में भगवंत मान को 63.9% लोगों का समर्थन मिला है, जबकि उनकी सरकार के समग्र कामकाज पर 57.70% लोगों ने संतोष जताया है।
मुख्यमंत्री की अपनी लोकप्रियता भले ही ऊंची बनी हुई है, लेकिन स्थानीय विधायकों के प्रदर्शन को लेकर जनता में असंतोष देखा जा रहा है। सर्वे के अनुसार, केवल 48.1% लोग ही अपने क्षेत्र के मौजूदा विधायक के काम से संतुष्ट हैं। इसके अलावा, केवल 42.4% लोग अपने मौजूदा विधायक को दोबारा चुनने के पक्ष में दिखे।
यह आंकड़ा आम आदमी पार्टी के लिए एक चेतावनी की तरह है। इससे पता चलता है कि राज्य सरकार या मुख्यमंत्री के खिलाफ भले ही बड़ा गुस्सा न हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर विधायकों के खिलाफ एंटी-इन्कम्बेंसी काम कर रही है। यदि पार्टी ने चुनाव में कमजोर विधायकों के टिकट नहीं काटे, तो स्थानीय असंतोष कई सीटों के नतीजों को प्रभावित कर सकता है।
पंजाब में जनता के लिए आज भी सबसे बड़ी समस्या ड्रग्स ही बनी हुई है। सर्वे में शामिल लगभग 39.3% लोगों ने नशे को अपने इलाके की सबसे बड़ी समस्या करार दिया है। यानी हर दस में से चार लोग नशे की समस्या से सीधे परेशान हैं। इतना ही नहीं, 22.2% लोगों ने नशे पर लगाम न लगा पाने को मान सरकार की सबसे बड़ी नाकामी माना है।
क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो माझा में स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहां 49% लोग नशे को अपनी मुख्य समस्या मानते हैं। नशे के बाद 13.2% लोगों के लिए खराब सड़कें दूसरी सबसे बड़ी स्थानीय समस्या हैं। इसके अलावा पेयजल, सीवरेज, बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था भी लोगों के लिए चुनावी मुद्दे बने हुए हैं, जिन पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है।
सरकार की कल्याणकारी योजनाएं आम आदमी पार्टी के लिए सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरी हैं। सर्वे में 79.7% परिवारों ने यह स्वीकार किया कि उन्हें पंजाब सरकार की कम से कम एक सरकारी योजना का सीधा लाभ मिल रहा है। योजनागत लाभों का यह व्यापक दायरा जनता को सरकार से जोड़े रखने में कामयाब रहा है।
विशेष रूप से, 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का फायदा 49.9% परिवारों को मिल रहा है, जिसे सरकार की सबसे बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। महिलाओं के लिए चलाई जा रही 'मावां धीयां सत्कार योजना' का लाभ 58.1% परिवारों तक पहुंचा है। लगभग 70% महिलाओं ने कैश ट्रांसफर का फायदा मिलने की बात स्वीकार की है। वहीं, 40.6% परिवारों को घर-घर राशन योजना का लाभ मिल रहा है।
ओपिनियन पोल में 22 ऐसी विधानसभा सीटों की पहचान की गई है जहां विभिन्न दलों के बीच कांटें की टक्कर है। इनमें से 6 सीटें-खेम करण, पट्टी, फिल्लौर, बलाचौर, खरड़ और फाजिल्का में बिल्कुल बराबरी का मुकाबला दिख रहा है। इन नजदीकी सीटों पर हार-जीत का मामूली अंतर ही पूरे चुनाव का रुख बदल सकता है।
सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि सर्वे में अभी भी 22.5% मतदाताओं ने यह तय नहीं किया है कि वे किसे वोट देंगे। करीब एक-चौथाई अनडिसाइडेड वोटरों की मौजूदगी यह बताती है कि चुनाव तक माहौल बदल भी सकता है। आने वाले महीनों में राजनीतिक गठबंधनों, घोषणापत्रों और प्रचार अभियानों के आधार पर ये मतदाता किसी भी दल का खेल बना या बिगाड़ सकते हैं।
अक्टूबर 2026 के इस ओपिनियन पोल का सार यह है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी फिलहाल मजबूत स्थिति में खड़ी नजर आ रही है। महिलाओं का भारी समर्थन, भगवंत मान का चेहरा और मुफ्त बिजली जैसी जन कल्याणकारी योजनाएं AAP को सत्ता के करीब बनाए हुए हैं।
फिर भी, 2022 जैसी एकतरफा लहर अब नहीं है। नशे की समस्या, स्थानीय विधायकों से नाराजगी और अनिर्णीत मतदाताओं का बड़ा वर्ग विपक्षी दलों के लिए भी दरवाजे खुले रखता है। यदि कांग्रेस या अन्य दल आने वाले समय में एक जुट होकर आक्रामक रणनीति अपनाते हैं, तो चुनावी जंग और अधिक दिलचस्प हो सकती है।