Omar Abdullah CEC Gyanesh Kumar Bharat Ratna Jibe: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक घमासान अब और तेज हो गया है। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 'पद्म भूषण' सम्मान देने की मांग किए जाने पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तीखा तंज कसा है।
उमर अब्दुल्ला ने कटाक्ष करते हुए कहा कि समिक भट्टाचार्य सिर्फ पद्म भूषण पर ही क्यों रुक रहे हैं, उन्हें तो सीधे 'भारत रत्न' से सम्मानित किया जाना चाहिए और दो साल में राष्ट्रपति भवन भेज देना चाहिए, क्योंकि उन्होंने भाजपा के लिए इतना कुछ किया है।
उमर अब्दुल्ला ने चुनाव आयोग को नसीहत देते हुए कहा कि आयोग को अपनी गलतियां छिपाने के बजाय अपने कामकाज में सुधार करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग पर लग रहे आरोपों के सबूत किसी राजनीतिक दल ने नहीं, बल्कि मीडिया रिपोर्ट की पड़ताल के जरिए सामने आए हैं।
दरअसल, यह पूरा विवाद एक अंग्रेजी समाचार पत्र की रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया था कि अन्य चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) ने 10 महीनों में मतदाता सूची और प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर 14 बार अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण दिए जाने की मांग पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य की मांग पर तंज कसते हुए कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार इसके हकदार हैं तो उन्हें पद्म भूषण तक सीमित क्यों रखा जाए।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें भारत रत्न दिया जाना चाहिए और दो साल बाद राष्ट्रपति भवन में बैठा देना चाहिए। उन्होंने यह टिप्पणी करते हुए भाजपा के लिए ज्ञानेश कुमार के कथित योगदान का भी जिक्र किया।
उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया सामिक भट्टाचार्य के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को कम से कम पद्म भूषण का पात्र बताया था।
भट्टाचार्य ने ज्ञानेश कुमार को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव बिना हिंसा के कराने और मतदाता सूची से कथित अवैध बांग्लादेशी मतदाताओं को हटाने की प्रक्रिया से जोड़ते हुए उनकी प्रशंसा की थी।
चुनाव आयोग को लेकर मौजूदा विवाद एक इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट के बाद सामने आया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता
सूची तथा SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर करीब 10 महीने के दौरान कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद विपक्ष की ओर से ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग और आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए।
चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों में किसी तरह के मतभेद के आरोपों को लेकर कहा है कि ये निर्णय सभी की सहमति से लिए गए थे।
आयोग के मुताबिक बैठकों के दौरान होने वाली अलग-अलग राय आंतरिक चर्चा का हिस्सा होती है। वहीं, मतदाता आंकड़ों में बदलाव को लेकर मिली शिकायतों के बाद आयोग ने वोटर लिस्ट से जुड़े सॉफ्टवेयर की जांच के निर्देश भी दिए हैं।