वाराणसी पर्यटन स्थल डिजाइन फोटो
अस्सी घाट: गंगा किनारे बसे बनारस शहर को दुनिया की सबसे पुरानी जीवित बस्तियों में गिना जाता है। मंदिर, घाट, संगीत और स्वाद की इस नगरी में घूमने लायक 10 ख़ास जगहें जानिए, उनके इतिहास के साथ।काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में गिना जाता है और काशी की पहचान है। इतिहास में इस पर कई बार हमले हुए और इसका पुनर्निर्माण भी हुआ। वर्तमान मंदिर का निर्माण 1780 में इंदौर की रानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था। हाल के वर्षों में बने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर ने मंदिर को गंगा घाट से सीधे जोड़ दिया है।शाम को होने वाली गंगा आरती यहाँ का सबसे चर्चित आकर्षण है। दीपों की कतार, शंखनाद और मंत्रोच्चार से पूरा घाट भक्तिमय हो जाता है। मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने यहाँ दस अश्वमेध यज्ञ किए थे, इसी से घाट का नाम पड़ा। आरती के समय भीड़ बढ़ जाती है, इसलिए थोड़ा पहले पहुँचना अच्छा रहता है।शहर के दक्षिणी छोर पर स्थित अस्सी घाट गंगा और अस्सी नदी के संगम के पास माना जाता है। यहाँ सुबह के समय संगीत, योग और आरती के कार्यक्रम होते हैं, जो शांति और ऊर्जा दोनों देते हैं। संत तुलसीदास से भी इस क्षेत्र का नाम जुड़ा बताया जाता है। यह घाट छात्रों, कलाकारों और विदेशी सैलानियों की पसंदीदा जगह है।मणिकर्णिका घाट बनारस के सबसे पुराने और प्रसिद्ध घाटों में से एक है। मान्यता है कि यहाँ का अंतिम संस्कार मोक्ष की ओर ले जाता है और यहाँ चिताएँ दिन-रात जलती रहती हैं। यह स्थान जीवन की नश्वरता का गहरा एहसास कराता है। यहाँ जाएँ तो श्रद्धा और संवेदनशीलता का ध्यान रखें और तस्वीरें लेने से बचें।बनारस शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर सारनाथ बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थों में गिना जाता है। माना जाता है कि ज्ञान प्राप्ति के बाद गौतम बुद्ध ने यहीं पहली बार धर्म का उपदेश दिया। यहाँ धमेख स्तूप, मूलगंध कुटी विहार और सम्राट अशोक के काल के अवशेष देखे जा सकते हैं। भारत का राष्ट्रीय चिह्न अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष यहीं से मिला था, जो अब सारनाथ संग्रहालय में है।काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना 1916 में पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। यह एशिया के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। परिसर में बना नया विश्वनाथ मंदिर अपनी भव्य सफ़ेद संरचना के लिए जाना जाता है। हरे-भरे परिसर में टहलना भी एक सुकून भरा अनुभव है।गंगा के दूसरे किनारे पर बना यह किला अठारहवीं सदी में काशी नरेश के संरक्षण में बना माना जाता है। यहाँ का संग्रहालय पुरानी बग्घियों, हथियारों, वस्त्रों और शाही सामान के लिए जाना जाता है। यह किला काशी राजपरिवार की परंपराओं से जुड़ा हुआ है। नाव या पुल से यहाँ पहुँचा जा सकता है।माना जाता है कि संकट मोचन मंदिर की स्थापना बीसवीं सदी की शुरुआत में हुई। यहाँ मंगलवार और शनिवार को भक्तों की भीड़ रहती है। हर साल यहाँ संकट मोचन संगीत समारोह होता है, जिसमें देश के बड़े शास्त्रीय कलाकार प्रस्तुति देते हैं। इसे बनारस की सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत उदाहरण माना जाता है।लाल रंग के पत्थरों से बना दुर्गा मंदिर बनारस के लोकप्रिय मंदिरों में है। इसके पास का तुलसी मानस मंदिर संगमरमर से बना है और इसकी दीवारों पर रामचरितमानस की चौपाइयाँ उकेरी गई हैं। यह मंदिर गोस्वामी तुलसीदास की स्मृति से जुड़ा है। दोनों मंदिर पास-पास हैं, इसलिए एक साथ घूमे जा सकते हैं।बनारस सिर्फ़ मंदिरों और घाटों का नहीं, गलियों का भी शहर है। यहाँ कचौरी-जलेबी, ठंडाई और मलाइयो जैसे स्वाद मिलते हैं। बनारसी साड़ी की बुनाई इस शहर की पारंपरिक कला है। घाटों के किनारे संकरी गलियों में घूमते हुए शहर की असली धड़कन महसूस होती है। नाव की सवारी और घाटों पर सुबह की सैर भी यात्रा का यादगार हिस्सा बन सकती है।