तीजन बाई (सोर्स सोशल मीडिया) 
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Pandavani Folk Singer: गरीबी से पद्म विभूषण तक... तीजन बाई की प्रेरणादायक कहानी तस्वीरों में

Teejan Bai Life Story: पंडवानी की महान लोकगायिका तीजन बाई के जीवन, संघर्ष, सम्मान और उपलब्धियों के बारे में जानिए इस खास फोटो गैलरी में।

तीजन बाई का जन्म भिलाई से 14 किमी दूर गनियारी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम चुनुक लाल पारथी और माता का नाम सुखवती था। वह छत्तीसगढ़ राज्य की पारधी की अनुसूचित जनजाति से थी। वह अपने पांच भाई-बहनों में सबसे बडी बहन थी। उन्होंने अपने नाना को सबल सिंह चौहान द्वारा लिखी महाभारत का पाठ करते सुना। उन्होंने तुरंत महाभारत के अन्य पाठ याद किये। इतना ही नही उन्होंने उमेश सिंह देशमुख से प्रशिक्षण प्राप्त किया।
13 वर्ष की आयु में तीजन बाई ने अपने पड़ोसी गांव में कुल दस रूपये के लिए अपना पहला प्रोग्राम किया था, जिसमें उन्होंने खड़े होकर पांडवनी गाया था। यह किसी महिला के लिए ये गीत गाना पहली बार था। उनकी आवाज का जादू देखते ही देखते चारों तरफ फैल गया और उस क्षेत्र को पुरूषों का गढ़ मानते थे। कुछ ही समय में वह अपने आसपास के गांवों में प्रसिद्ध हो गई और विशेष अवसरों और त्योहारों पर प्रदर्शन करने जाती थी।
तीजन बाई को अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा मौका मध्य प्रदेश के एक थिएटर कलाकार हबीब तनवीर के जरिए से मिला और उन्हें उस समय बनी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने एक प्रोग्राम करने के लिए बुलाया गया। उनकी समय के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। सन् 1988 में पद्म श्री पुरस्कार, 1995 में संगीत अकादमी पुरस्कार और इतना ही नही उन्हें 2019 में पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था।
साल 1980 के दशक में शुरू होकर, उन्होंने एक सांस्कृतिक राजदूत के रूप में दुनिया भर की यात्रा की। इसी के साथ इंग्लैंड, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, तुर्की, ट्यूनीशिया, माल्टा, साइप्रस, रोमानिया और मॉरीशस जैसे दूर-दराज के देशों में भी गई। इसके अलावा उन्होंने जवाहरलाल नेहरू की पुस्तक पर आधारित श्याम बेनेगल की प्रशंसित दूरदर्शन टीवी श्रृंखला भारत एक खोज में महाभारत के दृश्यों का प्रदर्शन भी किया था।
तीजन बाई की पर्सनल लाइफ बेहद मुश्किलों और संघर्षों से भरी रही है। उनकी पहली शादी 12 साल की उम्र में कर दी गई थी। जब उन्होंने पंडवानी गाना शुरू किया, तो उन्हें अपने ही परिवार और समाज के भारी विरोध का भी सामना करना पड़ा। इस वजह से उनकी पहली शादी टूट गई। समाज के बहिष्कार के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी बल्कि उसके बाद में उन्होंने तुकाराम उर्फ टुक्का राम से दूसरी शादी की।
तीजन बाई ने पांच दशकों से भी ज्यादा समय तक मंच पर रहकर देश-विदेश में हजारों लाइव परफॉर्मेंस दी है, इसके अलावा उन्होंने बड़े सिंगर्स की तरह स्टूडियो के बंद कमरों में बैठकर भी हजारों गाने रिकॉर्ड तो नहीं किए, लेकिन जब वो हाथ में तंबूरा लेकर मंच पर उतरती थीं, तो महाभारत की कहानियों में जैसे जान फूंक देती थीं। उनका ये जीवंत अंदाज लोगों को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर देता था।
तीजन बाई कला की दुनिया में सिर्फ अपनी बेहतरीन गायकी के लिए नहीं, बल्कि अपनी गजब की हिम्मत के लिए भी जानी जाती हैं। पिछले कई हफ्तों से तीजन बाई रायपुर AIIMS में भर्ती थीं और गंभीर रूप से बीमार चल रही थीं। आज सुबह करीब 3:15 बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर को सुनकर छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश के सांस्कृतिक और कला जगत में शोक में डूब गया है।

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