श्री सिद्धिविनायक मंदिर कॉरिडोर प्रोजेक्ट (सोर्स: एक्स@Dev_Fadnavis)
देश और दुनिया में करोड़ों हिंदुओं की आस्था का बड़ा केंद्र माने जाने वाले मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक मंदिर का कायाकल्प होने जा रहा है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोमवार को सिद्धिविनायक मंदिर कॉरिडोर प्रोजेक्ट के पहले चरण का भूमि पूजन किया। इस दौरान मुंबई की मेयर रितु तावड़े व अन्य लोग उपस्थित थे।महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सिद्धिविनायक मंदिर कॉरिडोर बनने से श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां रोज लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।इस अवसर पर विधान परिषद समूह के नेता प्रसाद लाड, मुंबई के उपमहापौर संजय घड़ी, सिद्धिविनायक मंदिर के कोषाध्यक्ष और सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदानंद सरवणकर, भाजपा मुंबई के महासचिव आचार्य पवन त्रिपाठी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।करीब सवा दो सौ वर्ष पुराने मुंबई के प्रभादेवी में स्थित प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर की स्थापना 19 नवंबर 1801 को हुई थी। इसका निर्माण एक निःसंतान महिला देउबाई पाटिल और लक्ष्मण विट्ठू द्वारा कराया गया था, ताकि भगवान गणेश के आशीर्वाद से अन्य महिलाओं को संतान सुख की प्राप्ति हो सके।अब श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए मंदिर कॉरिडोर प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस भव्य कॉरिडोर के निर्माण से अब मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय और आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी। डिप्टी सीएम शिंदे ने बताया कि यह प्रोजेक्ट अगले दो में पूरा हो जाएगा।सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी ने बताया कि मंदिर के सौंदर्यीकरण और कॉरिडोर परियोजना का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि कॉरिडोर निर्माण के बाद भक्तों को दर्शन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। परियोजना के तहत आधुनिक पार्किंग सुविधा, बेहतर कतार प्रबंधन और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की जाएगी।आचार्य पवन त्रिपाठी ने कहा कि मंदिर परिसर में ऐसा कॉरिडोर विकसित किया जाएगा, जहां श्रद्धालुओं को गर्मी, धूप या बारिश से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए सुविधाओं का विस्तार बेहद आवश्यक हो गया था। ट्रस्ट का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव के साथ-साथ आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हों, जिससे उनका दर्शन अनुभव अधिक सहज और सुगम बन सके।