पितृपक्ष भोजन नियम सोर्स- सोशल मीडिया
पितृपक्ष पूर्वजों को श्रद्धा से याद करने और उनके लिए श्राद्ध, तर्पण व पिंडदान करने का समय माना जाता है। इस दौरान खान-पान में भी सादगी रखने की परंपरा है। मान्यता है कि सात्त्विक भोजन मन को शांत और पूजा-पाठ के लिए अनुकूल बनाए रखता है।वर्ष 2026 में पितृपक्ष का मुख्य श्राद्ध पक्ष 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक रहेगा। 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध माना जाएगा और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृपक्ष का समापन होगा। तिथियां स्थान और पंचांग के अनुसार थोड़ी बदल सकती हैं।कई हिंदू परिवारों में पितृपक्ष के दौरान प्याज और लहसुन का सेवन नहीं किया जाता। आयुर्वेदिक और धार्मिक परंपराओं में इन्हें राजसिक या तामसिक प्रकृति वाला माना गया है। पितृपक्ष में मन को शांत रखने और पूजा-पाठ पर ध्यान केंद्रित करने के लिए इनसे दूरी रखने की परंपरा है।पितृपक्ष में मांस, मछली, अंडे और अन्य मांसाहारी भोजन से परहेज करने की परंपरा कई परिवारों में है। धार्मिक दृष्टि से इस समय सादा और सात्त्विक भोजन करने पर जोर दिया जाता है। इसका उद्देश्य श्रद्धा, संयम और शुद्ध आचरण को महत्व देना है।पितृपक्ष के दौरान शराब और अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने की धार्मिक मान्यता है। यह समय पूर्वजों के प्रति सम्मान और आत्मसंयम का माना जाता है। इसलिए कई परिवार इन दिनों नशे से पूरी तरह दूरी रखते हैं और शांत वातावरण बनाए रखने पर जोर देते हैं।पितृपक्ष में भोजन को हल्का, सरल और कम मसाले वाला रखने की परंपरा है। बहुत अधिक मिर्च-मसाले वाला भोजन रोजमर्रा के सात्त्विक भोजन की भावना से अलग माना जा सकता है। इसलिए दाल, चावल, रोटी, सब्जी और सादा भोजन अधिक पसंद किया जाता है।श्राद्ध और तर्पण जैसे धार्मिक कार्यों में ताजे भोजन को विशेष महत्व दिया जाता है। इसलिए बासी या लंबे समय से रखा हुआ भोजन खाने और परोसने से बचने की परंपरा है। भोजन साफ-सुथरा, ताजा और उचित तरीके से तैयार करना बेहतर माना जाता है।पितृपक्ष में आमतौर पर सादा शाकाहारी भोजन रखा जाता है। दाल, चावल, रोटी, मौसमी सब्जियां, फल, दूध, दही और सीमित मसालों से बना भोजन कई परिवारों में लिया जाता है। हालांकि श्राद्ध के दिन बनने वाले भोजन की परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है।श्राद्ध कर्म में काले तिल, जौ और जल का विशेष धार्मिक महत्व बताया जाता है। तर्पण में काले तिल का प्रयोग कई परंपराओं में किया जाता है। भोजन और पूजा सामग्री के नियम परिवार की परंपरा तथा स्थानीय रीति के अनुसार तय किए जा सकते हैं।जिस दिन किसी पूर्वज का श्राद्ध किया जाता है, उस दिन भोजन को विशेष श्रद्धा से तैयार किया जाता है। कई परिवारों में बिना प्याज-लहसुन का भोजन बनाया जाता है और पहले पितरों के निमित्त भोजन अर्पित किया जाता है। इसके बाद परिवार के लोग भोजन करते हैं।