नाना पाटेकर अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाला चेहरा हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। दमदार अभिनय और बेबाक अंदाज ने उन्हें दर्शकों के बीच अलग पहचान दी।नाना पाटेकर का जन्म विश्वनाथ पाटेकर के रूप में 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। आगे चलकर ‘नाना’ नाम ही उनकी पहचान बन गया।उन्होंने मुंबई के सर जे.जे. इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट में पढ़ाई की और कला की बारीकियों से परिचित हुए। यही रचनात्मक आधार आगे उनके अभिनय में भी दिखाई दिया।नाना पाटेकर ने 1978 की फिल्म ‘गमन’ से अभिनय की दुनिया में कदम रखा। शुरुआती दौर में उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाईं।1989 की फिल्म ‘परिंदा’ में उनके प्रभावशाली अभिनय को खूब सराहा गया और उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।1994 की ‘क्रांतिवीर’ में प्रताप नारायण तिलक का किरदार नाना के करियर की यादगार भूमिकाओं में शामिल हुआ। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।1991 में नाना पाटेकर ने ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ के जरिए निर्देशन में भी हाथ आजमाया। फिल्म में उन्होंने सैन्य पृष्ठभूमि वाले किरदार को भी प्रभावी ढंग से निभाया।नाना ने गंभीर और तीखे किरदारों के साथ कॉमेडी में भी अपनी अलग छाप छोड़ी। ‘अब तक छप्पन’, ‘राजनीति’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों ने उनके अभिनय का अलग-अलग रंग दिखाया।2016 की मराठी फिल्म ‘नटसम्राट’ में उन्होंने रंगमंच के दिग्गज कलाकार की भूमिका निभाई। इस प्रदर्शन के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर मराठी पुरस्कार मिला।2015 में नाना पाटेकर और अभिनेता मकरंद अनासपुरे ने नाम फाउंडेशन की स्थापना की। संस्था महाराष्ट्र में किसानों, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास से जुड़े कामों पर सक्रिय रही।नाना पाटेकर को तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों सहित कई सम्मान मिले और 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। अभिनय, रंगमंच और समाजसेवा तीनों क्षेत्रों में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।