मुंबई के 10 प्रसिद्ध गणपति सोर्स- सोशल मीडिया
फोटो

Mumbai Famous Ganpati: मुंबई के टॉप 10 फेमस गणपति, दर्शन के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं भक्त

Mumbai Famous Ganpati Pandals: मुंबई के प्रसिद्ध गणपति पंडालों में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। जानिए लालबागचा राजा से लेकर अंधेरीचा राजा तक 10 मशहूर गणपतियों की खास पहचान।

अंकिता पटेल
मुंबई के सबसे चर्चित गणपतियों में लालबागचा राजा का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। लालबाग में विराजमान इस गणपति की स्थापना 1934 से होती आ रही है। इन्हें ‘नवसाचा गणपति’ यानी मनोकामना पूरी करने वाले गणपति के रूप में श्रद्धा से देखा जाता है। यहां दर्शन के लिए हर साल भारी भीड़ उमड़ती है।
लालबाग के गणेश गली में विराजमान मुंबईचा राजा भी मुंबई के लोकप्रिय गणपतियों में शामिल हैं। इस मंडल की शुरुआत 1928 में हुई थी। यहां हर साल पंडाल की सजावट और गणपति की प्रस्तुति में अलग-अलग विषयों को रचनात्मक अंदाज में दिखाया जाता है।
किंग्स सर्कल में विराजमान जीएसबी सेवा मंडल महागणपति अपनी पारंपरिक पूजा और भव्य आभूषणों के लिए खास पहचान रखते हैं। यहां गणपति की प्रतिमा को सोने-चांदी के आभूषणों से सजाया जाता है। इस मंडल की धार्मिक परंपराएं भी इसे मुंबई के अन्य गणपतियों से अलग बनाती हैं।
मुंबई के पुराने और प्रतिष्ठित गणपति मंडलों में चिंचपोकलीचा चिंतामणि का नाम भी प्रमुख है। चिंचपोकली में स्थापित होने वाले इस गणपति की परंपरा 1920 से जुड़ी है। यहां श्रद्धालुओं को भव्यता के साथ पारंपरिक भक्ति और पुराने मुंबई की सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिलती है।
ग्रांट रोड के खेतवाडी इलाके में विराजमान खेतवाडीचा गणराज अपनी कलात्मक और विशाल गणेश प्रतिमाओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां अलग-अलग वर्षों में आकर्षक और ऊंची प्रतिमाएं देखने को मिलती रही हैं। पंडाल की सजावट भी श्रद्धालुओं और गणपति उत्सव प्रेमियों के लिए खास आकर्षण रहती है।
मुंबई के पश्चिमी उपनगर में अंधेरीचा राजा गणेशोत्सव का बड़ा आकर्षण है। इस मंडल की शुरुआत 1966 में हुई थी। यहां श्रद्धा के साथ सामाजिक विषयों और आकर्षक सजावट को भी महत्व दिया जाता है। विसर्जन यात्रा भी इस गणपति उत्सव की खास पहचान मानी जाती है।
गिरगांवचा राजा मुंबई के पारंपरिक गणेशोत्सव की खूबसूरत झलक पेश करता है। यहां का उत्सव अपनी सादगी, पारंपरिक माहौल और मराठी संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुति के लिए जाना जाता है। ऐसे गणपति मंडल मुंबई के पुराने सामुदायिक गणेशोत्सव की विरासत को आज भी जीवित रखते हैं।
गिरगांव की केशवजी नाइक चॉल का गणपति मुंबई के ऐतिहासिक सार्वजनिक गणेशोत्सव से जुड़ा नाम है। इसकी परंपरा 1893 से बताई जाती है। यहां गणेशोत्सव की पुरानी सामुदायिक भावना और पारंपरिक पूजा-पद्धति की झलक मिलती है। यही वजह है कि इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वालों के लिए यह जगह खास है।
परेल का गणपति भी मुंबई के लोकप्रिय गणेशोत्सव स्थलों में शामिल है। परेल और आसपास के इलाकों में गणेशोत्सव की पुरानी सामुदायिक परंपरा रही है। यहां भक्त बड़ी संख्या में बप्पा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और उत्सव का माहौल पूरे इलाके को भक्ति से भर देता है।
मुंबई के पुराने इलाकों में गणेशोत्सव केवल बड़ी मूर्तियों और भव्य पंडालों तक सीमित नहीं है। छोटे लेकिन परंपरा से जुड़े मंडल भी शहर की पहचान हैं। कांबलीवाडी और आसपास के पुराने मोहल्लों में होने वाले गणपति उत्सव इसी सामुदायिक परंपरा और स्थानीय भागीदारी की झलक दिखाते हैं।

सीईओ के चयन पर श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट की सफाई, 11 अगस्त को इंटरव्यू में शामिल हुए थे जितेंद्र मिश्र

यूसीसी लागू करने के बयान पर चिराग पासवान का रिएक्शन, अमित शाह के बयान पर कहा- ड्राफ्ट सार्वजनिक हो

बिना कागज दिखाए उड़ गए इटली के तीन यात्री, गृह मंत्रालय ने बुलाई बैठक; IB चीफ भी होंगे मौजूद

UPI New Rule 2026: ₹2,000 तक के UPI और RuPay पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई चार्ज, सरकार का नोटिफिकेशन जारी

हिंदी दिवस पर SC की नई पहल, जल्द लॉन्च होगा जन सूचना पोर्टल; हिंदी ऑडियो और वीडियो के जरिए जान सकेंगे फैसला