निकिता पोरवाल (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
मिस वर्ल्ड बनने के लिए किसी भी प्रतियोगी का आत्मविश्वास सबसे जरूरी कड़ी होता है। जजों का ध्यान खींचने के लिए अपनी बात को निर्भीकता और स्पष्टता के साथ रखना जरूरी होता है। इसके साथ ही बौद्धिक क्षमता और हाजिरजवाबी की भी कड़ी परीक्षा ली जाती है। जब मुश्किल और समसामयिक मुद्दों पर सवाल पूछे जाते हैं, तब प्रतियोगी का दृष्टिकोण और उनकी समझ यह तय करती है कि वे इस अंतरराष्ट्रीय मंच के योग्य हैं या नहीं। सोच की स्पष्टता ही एक आम प्रतिभागी को विजेता बनाती है।मिस वर्ल्ड संगठन का मूल मंत्र 'ब्यूटी विद अ पर्पस' यानी उद्देश्यपूर्ण सुंदरता है। इसका सीधा मतलब यह है कि कंटेस्टेंट का जुड़ाव केवल अपनी व्यक्तिगत प्रगति से नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों से भी होना चाहिए।कंटेस्टेंट समाज सुधार, चैरिटी या किसी सामाजिक समस्या को हल करने में कितनी रुचि रखती है। जिन्होंने पहले से ही किसी सोशल वर्क पर काम किया है या जिनके पास समाज की भलाई के लिए साफ दृष्टिकोण है।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए भाषा और संवाद शैली पर मजबूत पकड़ होना बेहद जरूरी है। विभिन्न देशों के लोगों और मीडिया के साथ अपने विचारों का आदान-प्रदान सहजता से करने की क्षमता चुनौतियों का अहम हिस्सा है।इसके अलावा फिजिकल और मानसिक फिटनेस भी बहुत मायने रखती है। सही जीवनशैली, संतुलित खान-पान और पॉजिटिव सोच से ही वह शारीरिक सौष्ठव और तेज हासिल होता है, जिसकी मांग इतने बड़े ग्लोबली की जाती है।सुंदरता और बुद्धिमत्ता के अलावा मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में 'टैलेंट राउंड' एक बेहद निर्णायक मोड़ साबित होता है। इस चरण में कंटेस्टेंट को अपनी कलात्मक प्रतिभा दिखानी होती है, चाहे वह डांस हो, म्यूजिक हो या फिर कोई अन्य अनोखा हुनर।