महाराष्ट्र रंगोली परंपरा सोर्स- सोशल मीडिया
फोटो

Maharashtra Rangoli: महाराष्ट्र में रंगोली बनाने की परंपरा कितनी पुरानी? जानिए इसके पीछे की मान्यता और इतिहास

Maharashtra Rangoli Tradition: महाराष्ट्र में रंगोली की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। जानिए घर के बाहर रंगोली बनाने की वजह, शाम के समय इसे बनाने की मान्यता व इसके सांस्कृतिक महत्व से जुड़ी बातें।

अंकिता पटेल
महाराष्ट्र में घर के प्रवेश द्वार और आंगन को रंगोली से सजाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। सफेद पाउडर और अलग-अलग रंगों से बनाई गई ये आकृतियां घर की सुंदरता बढ़ाने के साथ शुभता और स्वागत की भावना भी व्यक्त करती हैं।
रंगोली कब से बनाई जा रही है, इसकी कोई एक निश्चित तारीख ऐतिहासिक रिकॉर्ड में नहीं मिलती। इसे भारत की प्राचीन लोक-कला परंपराओं में गिना जाता है। महाराष्ट्र में भी यह कला पीढ़ी-दर-पीढ़ी घरेलू और सांस्कृतिक परंपरा के रूप में आगे बढ़ी है।
महाराष्ट्र के कुछ परिवारों में दिन की साफ-सफाई के बाद शाम को घर के दरवाजे पर रंगोली बनाने की परंपरा मिलती है। हालांकि, यह पूरे महाराष्ट्र में एक समान नियम नहीं है। कई जगह रंगोली सुबह भी बनाई जाती है, खासकर त्योहारों और शुभ अवसरों पर।
भारतीय लोकपरंपरा में रंगोली को शुभता, समृद्धि और सकारात्मक वातावरण से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि सुंदर रंगोली घर में आने वाले अतिथियों और शुभ अवसरों का स्वागत करती है। दीपावली पर इसे विशेष रूप से शुभ सजावट माना जाता है।
महाराष्ट्र सहित भारत के कई हिस्सों में रंगोली को दीपावली के दौरान देवी लक्ष्मी के स्वागत से जोड़ा जाता है। घर के साफ प्रवेश द्वार पर रंगोली और दीप सजाने की परंपरा इसी धार्मिक-सांस्कृतिक भावना का हिस्सा है। यह एक लोकमान्यता है, वैज्ञानिक तथ्य नहीं।
घर का प्रवेश द्वार परंपरागत रूप से स्वागत का स्थान माना जाता है। इसलिए यहां रंगोली बनाकर घर में आने वाले लोगों का स्वागत किया जाता है। फूलों, पत्तियों, ज्यामितीय आकृतियों और पारंपरिक प्रतीकों से बनी रंगोली दरवाजे को खास आकर्षण देती है।
पारंपरिक रूप से अलग-अलग क्षेत्रों में चावल के आटे, अनाज और प्राकृतिक रंगों जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता रहा है। महाराष्ट्र में सफेद रंग से बिंदु और रेखाएं बनाकर कई पारंपरिक आकृतियां तैयार की जाती हैं। आज बाजार में रंगोली के लिए कई तरह के तैयार रंग मिलते हैं।
महाराष्ट्र की कई पारंपरिक रंगोलियों में पहले जमीन पर बिंदुओं की एक संरचना बनाई जाती है। फिर उन बिंदुओं को रेखाओं और घुमावदार आकृतियों से जोड़ा जाता है। इस तरह कम सामग्री में भी सुंदर और संतुलित डिजाइन तैयार हो जाता है।
दिवाली, गुढ़ी पड़वा, नवरात्रि और दूसरे शुभ अवसरों पर रंगोली की सजावट और भी खास हो जाती है। त्योहारों के दौरान फूल, दीपक, कमल, मोर और ज्यामितीय आकृतियों वाले डिजाइन घर की सजावट का आकर्षण बढ़ाते हैं।
आज रंगोली केवल पारंपरिक सफेद आकृतियों तक सीमित नहीं है। फूलों, रंगीन पाउडर, स्टेंसिल और आधुनिक डिजाइनों से भी इसे सजाया जाता है। फिर भी इसके पीछे की मूल भावना-सुंदरता, स्वागत और सांस्कृतिक परंपरा आज भी कायम है।

TRAI का बड़ा फैसला! अब सिर्फ कॉल और SMS वाले सस्ते पैक भी होंगे उपलब्ध; ग्राहकों को मिलेगा ज्यादा विकल्प

चार राज्यों में विधान परिषद का चुनाव, निर्वाचन आयोग ने तारीख का किया ऐलान; 23 अक्टूबर को मतदान

अवैध गिरफ्तारी पर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट सख्त, लिखित आधार न बताने वाले अधिकारी के खिलाफ हो विभागीय जांच

मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है SC-ST एक्ट की धारा 18-A, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल, CJI करेंगे सुनवाई

वीजा-फ्री एंट्री की सुविधा पर मलेशिया जा रहे यात्री रहे अलर्ट, भारतीय हाई कमीशन ने क्यों चेताया ?