जियो प्लेटफॉर्म्स लिस्टिंग डिजाइन फोटो
जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में दमदार एंट्री ने देश के बड़े कारोबारी समूहों की रैंकिंग में बदलाव ला दिया। लिस्टिंग के बाद रिलायंस समूह सूचीबद्ध कंपनियों के संयुक्त बाजार मूल्य के आधार पर टाटा समूह से आगे निकल गया। इस उपलब्धि ने भारतीय शेयर बाजार में जियो की अहमियत को भी उजागर किया।जियो प्लेटफॉर्म्स का शेयर 1,119 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले ₹1,358 पर सूचीबद्ध हुआ। यानी शेयर ने करीब 21.36% प्रीमियम के साथ बाजार में शुरुआत की। मजबूत लिस्टिंग ने निवेशकों का ध्यान खींचा और कंपनी को बाजार में बड़ी पहचान दिलाई।लिस्टिंग के समय जियो प्लेटफॉर्म्स का बाजार पूंजीकरण करीब ₹12.5 लाख करोड़ रहा। इस मूल्यांकन के साथ कंपनी भारत की दूसरी सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बनी। बाजार पूंजीकरण किसी कंपनी के कुल सूचीबद्ध शेयरों के बाजार मूल्य को दर्शाता है और शेयर की कीमत बदलने के साथ इसमें भी बदलाव होता है।जियो की लिस्टिंग से रिलायंस समूह की बाजार में स्थिति और मजबूत हुई। रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले से ही देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में शीर्ष पर है। जियो के अलग से सूचीबद्ध होने के बाद निवेशकों को समूह के डिजिटल और टेलीकॉम कारोबार का बाजार मूल्य अलग से देखने का मौका मिला।जियो की लिस्टिंग के बाद संयुक्त बाजार पूंजीकरण के आधार पर टाटा समूह दूसरे स्थान पर आ गया। टाटा समूह की कई कंपनियां अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार करती हैं। रिलायंस और जियो की मजबूत बाजार वैल्यू ने दोनों समूहों के बीच प्रतिस्पर्धा को फिर चर्चा में ला दिया।देश के बड़े कारोबारी समूहों की इस तुलना में अदाणी समूह भी प्रमुख स्थान पर रहा। ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय समूह की सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण उसकी बाजार में स्थिति दर्शाता है। हालांकि, समूहों की रैंकिंग शेयरों की कीमतों के साथ बदल सकती है।जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को निवेशकों से मजबूत प्रतिक्रिया मिली। रिपोर्टों के मुताबिक, ₹30,213 करोड़ के इस इश्यू को कुल मिलाकर 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। बड़ी संख्या में आवेदन आने से डिजिटल और टेलीकॉम कारोबार को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी सामने आई।जियो प्लेटफॉर्म्स लिस्टिंग के दौरान भावुक हुए मुकेश अंबानी। जियो की लिस्टिंग केवल एक कंपनी के शेयर बाजार में आने की घटना नहीं है। इससे रिलायंस के डिजिटल कारोबार का अलग बाजार मूल्य सामने आया और बड़े कारोबारी समूहों की तुलना का नया आधार बना। हालांकि, बाजार पूंजीकरण कंपनी की बदलती शेयर कीमत पर निर्भर करता है।