अगारिया नमक खेती सोर्स- सोशल मीडिया
गुजरात के लिटिल रण ऑफ कच्छ की जमीन गर्मियों में दूर-दूर तक सफेद दिखाई देती है। यहां सामान्य खेती के बजाय हजारों परिवार नमक तैयार करने का काम करते हैं। इन्हें अगारिया कहा जाता है। पीढ़ियों से यह समुदाय कठोर मौसम के बीच नमक उत्पादन की पारंपरिक कला को आगे बढ़ा रहा है।अगारिया गुजरात का पारंपरिक नमक उत्पादक समुदाय है। हर साल मानसून के बाद परिवार लिटिल रण की ओर जाते हैं और कई महीनों तक वहीं रहकर नमक तैयार करते हैं। नमक का मौसम खत्म होने के बाद वे वापस अपने गांवों की ओर लौटते हैं।लिटिल रण ऑफ कच्छ का स्वरूप पूरे साल एक जैसा नहीं रहता। मानसून के दौरान यहां पानी भर जाता है। पानी घटने के बाद जमीन पर नमकीन मिट्टी और नीचे खारा पानी रह जाता है। यही प्राकृतिक परिस्थिति अगारिया परिवारों को नमक उत्पादन का आधार देती है।अगारिया परिवार जमीन के नीचे मौजूद खारे पानी यानी नमकीन जल को बाहर निकालते हैं। इसके लिए कुएं और पंप जैसी व्यवस्था बनाई जाती है। फिर इस पानी को तैयार किए गए नमक के खेतों में पहुंचाया जाता है। इसके बाद शुरू होती है सूर्य और हवा की प्राकृतिक भूमिका।नमक उत्पादन के लिए जमीन को समतल किया जाता है और मिट्टी की मेड़ बनाकर अलग-अलग हिस्से तैयार किए जाते हैं। इन्हें नमक के पैन कहा जा सकता है। जमीन को इस तरह तैयार किया जाता है कि खारा पानी एक हिस्से से दूसरे हिस्से में नियंत्रित तरीके से पहुंच सके।पंप की मदद से जमीन के नीचे का खारा पानी नमक के पैन में पहुंचाया जाता है। पानी को अलग-अलग चरणों से गुजारा जाता है। धूप और हवा के कारण पानी लगातार वाष्पित होता जाता है और उसमें मौजूद नमक की मात्रा बढ़ती जाती है।अगारिया नमक उत्पादन में सूर्य की गर्मी का इस्तेमाल करते हैं। पैन में जमा खारे पानी से धीरे-धीरे पानी उड़ता जाता है और नमक के क्रिस्टल जमीन पर जमने लगते हैं। इस प्रक्रिया में मशीनों से ज्यादा महत्व धूप, हवा, जमीन और समय का है।अगारिया परिवारों में महिलाएं नमक उत्पादन के कई कामों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। पानी की व्यवस्था, नमक के खेतों में काम और परिवार की दूसरी जिम्मेदारियां अक्सर साथ चलती हैं। गुजरात की स्वयं-रोजगार महिला संघ जैसी संस्थाओं ने नमक कामगार महिलाओं के लिए वित्त और ऊर्जा से जुड़े कार्यक्रम भी चलाए हैं।
रण में गर्मियों के दौरान तापमान बहुत ज्यादा हो सकता है। खुले इलाके में पेड़-पौधों और छांव की कमी के कारण काम करना कठिन होता है। लंबे समय तक तेज धूप, नमक और गर्म जमीन के संपर्क में रहना कामगारों के लिए स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ाता है।लिटिल रण में नमक बनाने के लिए खारा पानी उपलब्ध है, लेकिन पीने योग्य पानी की व्यवस्था अलग चुनौती है। कई नमक कामगार परिवारों को मौसम के दौरान अपने साथ पानी लाना पड़ता है या दूर से पानी की व्यवस्था करनी होती है। यानी जिस जमीन से नमक मिलता है, वहां मीठा पानी आसानी से नहीं मिलता।गुजरात भारत के नमक उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है। नमक विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2021-22 में राज्य का नमक उत्पादन करीब 2.28 करोड़ टन था। केंद्र सरकार का नमक विभाग गुजरात को देश के कुल नमक उत्पादन का लगभग 87.4 प्रतिशत हिस्सा देने वाला राज्य बताता है।थाली में दिखाई देने वाला नमक बेहद साधारण लग सकता है, लेकिन गुजरात के रण में उसके पीछे महीनों की मेहनत होती है। जमीन तैयार करने से लेकर खारा पानी निकालने, धूप में क्रिस्टल बनने और फिर नमक को बाजार तक पहुंचाने तक अगारिया परिवार कठिन परिस्थितियों में लगातार काम करते हैं।