दशहरे पर देखें ये फिल्में (सौ. सोशल मीडिया)
सलमान खान की फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ इंसानियत, प्यार और आपसी भाईचारे की खूबसूरत कहानी है। फिल्म में पवन नाम का एक नेकदिल इंसान एक पाकिस्तानी बच्ची मुन्नी को उसके परिवार से मिलाने के लिए हर संभव कोशिश करता है। फिल्म का संदेश है कि मानवता और सच्चाई की कोई सीमा नहीं होती। दशहरे के मौके पर यह फिल्म अच्छाई और प्रेम की ताकत की याद दिलाती है।रणबीर कपूर और आलिया भट्ट स्टारर ‘ब्रह्मास्त्र’ भारतीय पौराणिक कथाओं से प्रेरित एक फैंटेसी एडवेंचर फिल्म है। फिल्म का गाना ‘डांस का भूत’ दशहरे के जश्न और रावण दहन के माहौल के बीच फिल्माया गया है। भव्य दृश्य और अस्त्रों की दुनिया इसे त्योहार के लिहाज से खास बनाते हैं। फिल्म अच्छाई और बुराई के बीच संघर्ष को भी दिखाती है।सिद्धार्थ मल्होत्रा, तारा सुतारिया और रितेश देशमुख अभिनीत ‘मरजावां’ एक एक्शन-रोमांटिक ड्रामा है। फिल्म में बदले, प्यार और संघर्ष की कहानी देखने को मिलती है। इसके क्लाइमैक्स में दशहरे और रावण दहन की पृष्ठभूमि का इस्तेमाल किया गया है, जो कहानी के टकराव को नाटकीय रूप देता है।शाहरुख खान की ‘स्वदेश’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और देश के प्रति अपने कर्तव्य को समझने की कहानी है। नासा में काम करने वाला मोहन अपने गांव लौटकर वहां की समस्याओं को करीब से देखता है और बदलाव लाने की कोशिश करता है। फिल्म यह संदेश देती है कि समाज की बुराइयों को दूर करने की शुरुआत खुद से की जा सकती है।विद्या बालन की फिल्म ‘कहानी’ एक ऐसी महिला की कहानी है, जो अपने पति की तलाश में कोलकाता आती है। धीरे-धीरे यह तलाश रहस्य, साहस और अन्याय के खिलाफ संघर्ष में बदल जाती है। फिल्म का प्रभावशाली अंत दर्शकों को चौंका देता है। दशहरे के मौके पर इसे महिला के साहस और मुश्किल परिस्थितियों में हार न मानने की कहानी के रूप में देखा जा सकता है।अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी और अमजद खान की ‘शोले’ हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्मों में शामिल है। जय और वीरू की दोस्ती, बहादुरी और गब्बर सिंह के आतंक के खिलाफ संघर्ष इसकी कहानी का मुख्य हिस्सा है। गांव को भय से मुक्त कराने की कोशिश न्याय और साहस की अहमियत दिखाती है।
‘अग्निपथ’ में विजय दीनानाथ चौहान की कहानी दिखाई गई है, जो अपने पिता की मौत का बदला लेने और अन्याय के खिलाफ लड़ने का संकल्प लेता है। अमिताभ बच्चन की 1990 की फिल्म और ऋतिक रोशन की 2012 की रीमेक, दोनों में संघर्ष और प्रतिशोध अहम विषय हैं। दशहरे के अवसर पर यह फिल्म बुराई के खिलाफ खड़े होने और न्याय पाने की जद्दोजहद की याद दिलाती है।