गढ़मुक्तेशवर, हापुड़- उतरप्रदेश के हापुड़ जिले में गढ़मुक्तेश्वर घाट पर हर साल कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मेला लगता है। यहां भी शाम की आरती व श्रद्धालुओं द्वारा दीपदान किया जाता है। पानी में तैरते दीपक एक खूबसूरत और अलग अनुभव देते हैं। संगम घाट, प्रयागराज- उतरप्रदेश के प्रयागराज में स्थित संगम घाट में स्नान के लिए देश-विदेश से लाखों पर्यटक हर साल आते हैं। गंगा, यमुना और सरस्वती के मिलन से बने संगम घाट पर नाव से जाकर बीचों बीच डुबकी लगाना बेहद अलग और परम आनंद का अनुभव देता है। त्रिवेणी घाट, ऋषिकेश- यदि आप गंगा दशहरा पर शोरगुल से हटकर शांति से अपना दिन बिताना चाहते हैं, तो त्रिवेणी घाट आपके लिए बेहतरीन जगह है। ठंडी हवाएं और पहाड़ों के बीच बहती गंगा मां का दृश्य सुकून से भर देता है। दशाश्वमेध घाट, वाराणसी- वाराणसी को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है। कहते हैं वाराणसी भगवान शिव के त्रिशूल पर वास करता है। इस घाट का निर्माण ब्रम्हाजी ने भगवान शिव के स्वागत के लिए की थी। एक साथ कई पुजारियों द्वारा विशाल आरती, शंख की गूंज, डमरू की ताल और हवा में घुली धूप की महक से वातावरण पवित्र हो जाता है।हर की पौड़ी, हरिद्वार- पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और दानवों के बीच समुद्र मंथन हुआ, तब अमृत कलश बाहर निकला था। इस अमृत की कुछ बूंदें हरिद्वार में भी गिरी। यहां की भव्य आरती देखने के लिए दुनिया भर से श्रद्धालु इकठ्ठा होते हैं। हवा में गूंजते 'हर-हर गंगे' के जयकारे, मंदिर के घंटे और पानी की कल-कल से आपके मन को शांति की अनुभूति होगी।