पारंपरिक साड़ी में सजी महिला (सौ. पिन्टरेस्ट) 
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त्योहार हो या शादी, हर मौके के लिए बेस्ट हैं ये 7 पारंपरिक साड़ियां, आज ही करें अपने वॉर्डरोब में शामिल

Traditional Indian Saree: भारतीय पारंपरिक साड़ियां हर खास मौके पर आपकी खूबसूरती में चार चांद लगा देती हैं। चाहे त्योहार हो या शादी, सही साड़ी का चुनाव आपके लुक को और भी ग्रेसफुल बना सकता है। आप भी अपने वॉर्डरोब को स्टाइलिश और क्लासी बनाने के लिए इन पारंपरिक साड़ियों को शामिल सकती हैं।

प्रीति शर्मा
भारतीय संस्कृति में साड़ी केवल एक परिधान नहीं बल्कि एक गौरवशाली विरासत है। समय के साथ फैशन बदलता रहता है लेकिन पारंपरिक भारतीय साड़ियों का आकर्षण कभी कम नहीं होता। चाहे शादी-ब्याह का अवसर हो या कोई औपचारिक समारोह साड़ी हमेशा एक महिला के व्यक्तित्व में चार चांद लगा देती है। अगर आप भी अपने वार्डरोब को खास बनाना चाहती हैं तो भारत के अलग-अलग कोनों से निकली ये पारंपरिक साड़ियां आपके पास जरूर होनी चाहिए।
वाराणसी की बनारसी साड़ी अपनी शुद्ध रेशम और सोने-चांदी के जरी के काम के लिए जानी जाती है। यह साड़ी न केवल शादियों में पहली पसंद होती है बल्कि इसे एक हेरिटेज के तौर पर भी रखा जाता है। इसका शाही लुक हर महिला को खास महसूस कराता है।
तमिलनाडु के कांचीपुरम की यह साड़ी अपनी मजबूती और चमकदार बॉर्डर के लिए मशहूर है। कांजीवरम साड़ी की बुनाई इतनी बारीक होती है कि यह पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है। इसके सुनहरे बॉर्डर और चटकीले रंग इसे उत्सवों के लिए परफेक्ट बनाते हैं।
हल्के वजन और पारदर्शी बनावट वाली चंदेरी साड़ियां गर्मियों और कैजुअल इवेंट्स के लिए बेहतरीन हैं। सिल्क और कॉटन के मिश्रण से बनी ये साड़ियां पहनने में बेहद आरामदायक और देखने में बहुत ही एलिगेंट होती हैं।
गुजरात और राजस्थान का रंग देखना चाहते हैं तो बांधनी साड़ी खरीदें। टाई एंड डाई तकनीक से बनी बांधनी साड़ियां अपने लहरिया पैटर्न और जीवंत रंगों के लिए पहचानी जाती हैं। ये साड़ियां पूजा-पाठ और तीज-त्योहारों में महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं।
मोर के डिजाइन वाले पल्लू और शानदार सिल्क के लिए मशहूर पैठणी साड़ी को साड़ियों की महारानी कहा जाता है। महाराष्ट्र की इस पारंपरिक साड़ी का क्रेज बॉलीवुड से लेकर आम महिलाओं तक हमेशा बना रहता है।
गुजरात की पटोला साड़ी अपनी डबल इकत बुनाई के लिए जानी जाती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे दोनों तरफ से पहना जा सकता है। यह साड़ी निवेश के लिहाज से भी काफी कीमती मानी जाती है।
असम का मुगा सिल्क दुनिया के सबसे दुर्लभ रेशम में से एक है। इसकी सुनहरी चमक समय के साथ और बढ़ती जाती है। यह साड़ी सादगी और शालीनता का बेहतरीन उदाहरण है।
हाथ से की गई पेंटिंग और ब्लॉक प्रिंटिंग वाली कलमकारी साड़ियां कला प्रेमियों की पहली पसंद हैं। इनके अलावा चिकनकारी, संबलपुरी और पोचमपल्ली जैसी साड़ियां भी भारतीय पहनावे की विविधता को दर्शाती हैं।

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