जेपी नड्डा, PM मोदी और अमित शाह 
नॉर्थ ईस्ट

मणिपुर में सरकार बनाने की कवायद तेज, बीजेपी आलाकमान की सभी 37 विधायकों के साथ दिल्ली में बैठक

Manipur News: मणिपुर में सरकार बनाने की कवायद फिर से शुरू हो गई है. बीजेपी ने राष्ट्रपति शासन के बाद दोबारा सत्ता में आने के लिए अपने सभी 37 विधायकों को 14 दिसंबर को दिल्ली बुलाया है।

अर्पित शुक्ला

Manipur Violence News: मणिपुर की राजनीति में एक बार फिर तेजी से बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी ने राज्य में स्थिर सरकार बनाने की कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए अपने सभी 37 विधायकों को 14 दिसंबर को नई दिल्ली बुलाया है। इस कदम को राज्य में लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक गतिरोध और राष्ट्रपति शासन की अवधि समाप्त करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि यह बैठक मणिपुर में सरकार गठन से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा के लिए है।

मणिपुर विधानसभा में बीजेपी के पास 60 सदस्यीय सदन में 37 विधायक हैं, जिससे वह विधानसभा में मजबूत स्थिति में है, लेकिन किसी भी सरकार के गठन के लिए अन्य सहयोगियों की भूमिका भी अहम मानी जाती है।

मणिपुर में लागू है राष्ट्रपति शासन

राज्य में राजनीतिक अस्थिरता की पृष्ठभूमि में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मणिपुर में मई 2023 से जातीय हिंसा और राजनीतिक संकट के चलते राष्ट्रपति शासन लागू है और पिछले साल फरवरी में मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। विधानसभा भी सस्पेंड ऐनिमेशन के तहत है और सरकार गठन की प्रक्रिया रुकी हुई थी। दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व के साथ विधायकों की यह बैठक संभावित गठबंधन पर बातचीत, मुख्यमंत्री पद के दावों तथा नीतिगत एजेंडों पर चर्चाओं का मंच हो सकती है। राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि बैठक के बाद मणिपुर में जल्द ही सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

3 मई 2023 से शुरू हुई हिंसा

मणिपुर में मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग और उसके विरोध के कारण 3 मई 2023 को हिंसा भड़क उठी थी। एक रैली के बाद कुकी और मैतेई समुदाय आमने-सामने आ गए, और देखते ही देखते हिंसा फैल गई। विवाद इतना बढ़ गया था कि राज्य के कई जिलों में स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी, और कई इलाकों में आगजनी भी हुई थी। हिंसा में कई लोगों की मौत भी हुई थी। हालांकि, छिटपुट घटनाओं को छोड़कर फिलहाल मणिपुर में स्थिति शांतिपूर्ण है।

हिंसा के पीछे की वजह?

मणिपुर में मैतेई समुदाय एसटी दर्जे की मांग कर रहा था, ताकि उसे भी जनजाति का दर्जा मिल सके और आरक्षण का लाभ मिल सके। दूसरी ओर, कुकी और अन्य जनजातियां इसका विरोध कर रही थीं। उनका कहना था कि मैतेई समुदाय को एसटी का दर्जा नहीं मिलना चाहिए, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे उनके अधिकार खतरे में पड़ सकते हैं।

सीएम पद से इस्तीफा देते हुए एन. बीरेन सिंह ने मांगी थी माफी

तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने पद से इस्तीफा देते हुए राज्य की जनता से माफी भी मांगी थी। उन्होंने कहा था, "यह साल बेहद खराब रहा था। मैं राज्य के लोगों से पिछले साल 3 मई से लेकर आज तक जो भी कुछ हुआ है, उसके लिए माफी मांगता हूं। हिंसा में कई लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है। कुछ लोगों को अपना घर छोड़कर जाना पड़ा। मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में राज्य में सामान्य स्थिति बहाल हो जाएगी।"

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को दी चुनौती, फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची, नाम और सिंबल पर विवाद तेज

भस्मासुर है कांग्रेस…राहुल को पढ़ना चाहिए अपनी पार्टी का इतिहास, सहयोगियों को खत्म करना आदत: किरेन रिजिजू

तमिलनाडु में जन्म लेने वाले बच्चों को मिलेगा सोने का छल्ला, CM विजय ने किया ऐलान, वितरण के लिए बनेंगे 107 हब

DUSU Election 2026 LIVE: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के लिए मतदान समाप्त

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बन सकते हैं राहुल गांधी...शहजाद पूनावाला का तंज, बोले- 2029 में फिर PM बनेंगे मोदी