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यवतमाल जिले में कम बारिश और लंबे अंतराल के कारण खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
कपास की फसल पर विभिन्न कीटों का प्रकोप बढ़ने से उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है।
जिलाधिकारी ने पालकमंत्री संजय राठौड़ के निर्देश पर जल परियोजनाओं से पानी छोड़ने का निर्णय लिया।
Yavatmal Farmers: यवतमाल जिले में इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान बारिश में लंबे अंतराल और अपर्याप्त वर्षा के कारण फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ा है। कपास की फसल पर विभिन्न कीटों का प्रकोप बढ़ने के साथ ही फसलों की वृद्धि भी प्रभावित हुई है।
इससे उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका है। खेतों में खड़ी खरीफ फसलों को नुकसान से बचाने और तत्काल सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए किसानों ने जिलाधिकारी से जल परियोजनाओं में उपलब्ध पानी छोड़ने की मांग की थी। किसानों की इस गंभीर समस्या को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल कदम उठाए हैं।
पालकमंत्री संजय राठौड़ के निर्देशानुसार जिलाधिकारी ने फसलों की सुरक्षा और पशुओं के चारे की व्यवस्था के लिए विभिन्न मध्यम, लघु और बड़ी जल परियोजनाओं से पानी का पहला आवर्तन छोड़ने का निर्णय लिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पानी छोड़ते समय नागरिकों की पेयजल जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही शासन के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए उपलब्ध जल का नियोजन किया गया है।
जिला प्रशासन के इस निर्णय से अंतिम चरण में पहुंची खरीफ फसलों को संजीवनी मिलने की उम्मीद है। साथ ही, पशुओं के चारे की समस्या दूर करने में भी मदद मिलेगी, प्रशासन ने संबंधित क्षेत्र के किसानों से उपलब्ध पानी का उचित और नियोजित तरीके से उपयोग कर फसलों को बचाने की अपील की है।
पालकमंत्री संजय राठौड़ ने कहा कि जिले में सूखे की स्थिति को देखते हुए विभिन्न रियायते लागू की गई हैं और सूखा निवारण के लिए उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के कार्य भी किए जा रहे है। सूखे की स्थिति में किसानों को हरसंभव सहायता दी जाएगी।