PWD Property Attachment Case: यवतमाल स्थित सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के विशेष प्रकल्प अधिकारी कार्यालय में बुधवार को न्यायालय के आदेश पर कुर्की की कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई सावली-साखरतांडा मार्ग निर्माण परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि के बदले किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं दिए जाने के मामले में की गई। न्यायालय की इस कार्रवाई से विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार, यवतमाल तहसील के सावली-साखरतांडा मार्ग के निर्माण के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग ने किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया था। अधिग्रहण के बाद प्रभावित किसानों ने मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग करते हुए नागपुर स्थित भूमि न्यायाधिकरण में याचिका दायर की थी। सुनवाई के बाद न्यायाधिकरण ने किसानों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विभाग को बढ़ी हुई मुआवजा राशि का भुगतान करने का आदेश दिया।
न्यायाधिकरण के आदेश के बाद यवतमाल के दिवाणी न्यायालय ने भी विभाग को कई बार निर्धारित राशि जमा करने के लिए नोटिस जारी किए। न्यायाधीश तिवारी के हस्ताक्षर से जारी इन नोटिसों के बावजूद विभाग ने समय पर भुगतान नहीं किया। लगातार आदेशों की अवहेलना के बाद न्यायालय ने विभाग की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी कर दिया।
बुधवार को न्यायालय के आदेश का पालन कराने के लिए कोर्ट के बेलिफ जाधव, अधिवक्ता अभिजीत मानेकर, अधिवक्ता हेमंत गायकवाड़ तथा आवेदक किसान सावित्रीबाई राठोड, सुरेश राठोड सहित अन्य प्रभावित किसान विशेष प्रकल्प अधिकारी कार्यालय पहुंचे और कुर्की की कार्रवाई शुरू की गई।
इस दौरान कार्यकारी अभियंता पुरकर सरकारी कार्य से बाहर होने के कारण कार्यालय में मौजूद नहीं थे। बाद में उपकार्यकारी अभियंता घोडेराव ने प्रतिनिधियों से चर्चा की और न्यायाधिकरण के आदेशानुसार मुआवजे की राशि उपलब्ध कराने के लिए न्यायालय से तीन माह का समय देने का अनुरोध किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि विभाग इस संबंध में न्यायालय को पत्र भेजकर आवश्यक जानकारी और भुगतान की प्रक्रिया से अवगत कराएगा।
बताया जा रहा है कि यह मामला केवल एक प्रकरण तक सीमित नहीं है। कुल सात मामलों में किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा दिए जाने के आदेश लंबित हैं। इन सभी मामलों में न्यायालय ने विभाग से राशि की वसूली सुनिश्चित करने के लिए कुर्की वारंट जारी किए हैं।
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प्रभावित किसानों का कहना है कि वर्षों से न्यायालय के आदेश के बावजूद उन्हें उनका वैधानिक मुआवजा नहीं मिल पाया है। ऐसे में न्यायालय की यह कार्रवाई उनके अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग निर्धारित समय में न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए किसानों को उनका बढ़ा हुआ मुआवजा कब तक उपलब्ध कराता है।