पानी टंकी (फाइल फोटो) 
यवतमाल

यवतमाल में 'जल' संकट नहीं, 'बिल' संकट! सरकारी विभागों पर ₹34.28 करोड़ की पानीपट्टी बकाया, नोटिस जारी

Yavatmal Irrigation Water Tax: यवतमाल सिंचन मंडल का ₹34.28 करोड़ का पानी बिल बकाया। एमआईडीसी पर सबसे अधिक ₹20.85 करोड़ की देनदारी। प्रशासन ने मार्च 2026 तक भुगतान के दिए निर्देश।

प्रिया जैस

MIDC Yavatmal Water Dues: यवतमाल जिला सिंचन मंडल की ओर से जिले की विभिन्न सरकारी तथा निजी संस्थाओं पर कुल 34 करोड़ 28 लाख 9 हजार रुपये की पानीपट्टी (जल शुल्क) बकाया होने की जानकारी सामने आई है। इनमें सबसे अधिक 20 करोड़ 85 लाख रुपये की बकाया रकम महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल (एमआईडीसी), यवतमाल पर है।

कई वर्षों से लगातार वसूली के लिए प्रयास और नोटिस देने के बावजूद यह राशि अब तक जमा नहीं की गई है। यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया तो संबंधित संस्थाओं पर कार्रवाई की जाएगी, ऐसी चेतावनी सिंचाई मंडल ने दी है। जिले की नगर परिषद, नगर पंचायत, महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण, जिला परिषद, एमआईडीसी तथा अन्य संस्थाओं पर यह बकाया कई वर्षों से लंबित है।

संबंधित विभागों की ओर से बार-बार नोटिस भेजकर वसूली का प्रयास किया गया, लेकिन कुछ संस्थाओं ने अब तक भुगतान नहीं किया है, जिससे बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है। इसलिए कानूनी प्रक्रिया शुरू होने से पहले संस्थाओं से बकाया राशि जमा करने की अपील सिंचन मंडल ने की है।

बैठक में हुआ खुलासा

बिगर सिंचाई जल शुल्क वसूली के संदर्भ में जिलाधिकारी के निर्देश पर गुरूवार को यवतमाल के नियोजन भवन में अप्पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सिंचाई विभाग तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बकाया वसूली की समीक्षा की गई। बैठक में मार्च 2026 के अंत तक लंबित पानीपट्टी जमा करने के निर्देश दिए गए। बैठक में अतिरिक्त जिलाधिकारी अनिल खंडागले, यवतमाल सिंचाई मंडल के अधीक्षक अभियंता योगेश सोनवणे, कार्यकारी अभियंता गणेश राठोड, अरुणावती परियोजना के कार्यकारी अभियंता विनोद बागुल, बेंबला परियोजना के कार्यकारी अभियंता सागर काले, जिला परिषद जल आपूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता कालबांडे तथा एमआईडीसी, महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण और विभिन्न नगर परिषदों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

शुल्क निर्धारण और उपयोग में अंतर

कृषि के अलावा अन्य उपयोग के लिए सिंचाई परियोजनाओं से छोड़े गए पानी पर पानीपट्टी वसूली की जाती है। हालांकि संबंधित संस्थाओं का कहना है कि जितना पानी वास्तव में उपयोग किया गया है, उसी के आधार पर शुल्क लगाया जाए। पानी की निर्धारित मात्रा और वास्तविक उपयोग में अंतर होने के कारण भी कई मामलों में भुगतान लंबित है।

विभाग स्तर पर नोटिस जारी

सिंचाई मंडल के अधीक्षक अभियंता योगेश सोनवणे के अनुसार हर वर्ष विभागीय स्तर पर नोटिस जारी कर वसूली का प्रयास किया जाता है। कुछ संस्थाएं आंशिक भुगतान करती हैं, लेकिन कई वर्षों से किसी ने भी पूरी पानीपट्टी जमा नहीं की है, जिसके कारण बकाया लगातार बना हुआ है।

संस्थानुसार बकाया राशि (लाख रुपये में)

एमआईडीसी, यवतमाल – 2085.64, जिला परिषद जल आपूर्ति विभाग – 451.25, महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण – 239.85, सभी नगर परिषद/नगर पंचायत – 478.45, पंचायत समिति – 64.83, अन्य – 108.07, कुल बकाया : 3428.09 लाख रुपये अर्थात 34.28 करोड़ रुपये राशी बकाया है।

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