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राज्य सरकार ने यवतमाल जिले की सभी 16 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है।
जिले के कुल 2,142 गांव सूखे की स्थिति से प्रभावित हुए हैं।
प्रशासन ने 8,77,072 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल नुकसान के पंचनामे पूरे कर रिपोर्ट वरिष्ठ स्तर पर भेज दी है।
Yavatmal Drought: यवतमाल जिले में इस वर्ष बारिश की अनियमितता और लंबे समय तक बारिश में खंड पड़ने के कारण खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ा है। किसानों को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार ने जिले के सभी 16 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। प्रशासन की ओर से फसल नुकसान का पंचनामा किया गया है। अब तक जिले में 8 लाख 77 हजार 72 हेक्टेयर क्षेत्र की फसलों के पंचनामे पूरे किए जा चुके हैं।
ऐसे में प्रभावित 2,142 गांव सूखे से प्रभावित जिले के यवतमाल, कलंब, घाटंजी, रालेगांव, दारव्हा, नेर, आर्णी, बाभुलगांव, पुसद, दिग्रस, उमरखेड, महागांव, पांढरकवडा, वणी, मारेगांव और झरी तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। इन 16 तहसीलों के कुल 2,142 गांव सूखे की स्थिति से प्रभावित हुए हैं। प्रशासन के अनुसार, जिले के 8,77,072 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों के नुकसान के पंचनामे पूरे कर उनकी रिपोर्ट वरिष्ठ स्तर पर भेज दी गई है। अब किसानों की निगाहें सहायता राशि के प्रस्ताव और उसके वितरण पर टिकी हैं।
सूखाग्रस्त क्षेत्रों में नुकसान का आकलन करने के लिए प्रशासन ने जीपीएस प्रणाली के माध्यम से सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए है। इसके तहत कुल गांवों में से 10 प्रतिशत गांवों का चयन कर सर्वेक्षण किया जाएगा। सर्वेक्षण की रिपोर्ट ऑनलाइन माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार को भेजी जाएगी। प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, पंचनामे की प्रक्रिया में दूसरे ट्रिगर के लागू होने के बाद पटवारी, ग्रामसेवक और कृषि विभाग को संयुक्त रूप से कार्य करना होगा। जीपीएस प्रणाली के जरिए संबंधित खेतों की लोकेशन दर्ज कर नुकसान का सर्वेक्षण किया जाएगा।
जिला कृषि अधीक्षक मनोजकुमार ढगे ने कहा कि जिले में 8 लाख 77 हजार 72 हेक्टेयर क्षेत्र के पंचनामे पूरे हो चुके हैं। इसकी रिपोर्ट वरिष्ठ स्तर पर भेज दी गई है।
सावरगांव के किसान प्रितेश कांबले ने कहा कि फसल से आमदनी नहीं होने के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। सरकार से सूखा सहायता जल्द मिलने पर किसानों को कुछ राहत मिल सकती है। अब किसानों को उम्मीद है ताकि आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों को राहत मिल सके।
सूखे और फसल नुकसान के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति चिंताजनक हो गई है। सोयाबीन और कपास जैसी प्रमुख फसलों से अपेक्षित आय नहीं होने के कारण अब किसानों के सामने घरेलू खर्च, पारिवारिक जिम्मेदारियों और बच्चों की शिक्षा का खर्च जुटाने की चुनौती खड़ी हो गई है।