महागांव ग्रामीण अस्पताल (सोर्सः सोशल मीडिया)
यवतमाल

महागांव ग्रामीण अस्पताल में मरीजों से लिया जा रहा निजी वाहन का शुल्क, एंबुलेंस सेवा पर गंभीर आरोप

Mahagaon Rural Hospital: महागांव और सवना ग्रामीण अस्पतालों में एंबुलेंस सेवा, ईंधन, सुरक्षा और मरीजों के परिवहन को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।

आंचल लोखंडे

Mahagaon Ambulance Service: यवतमाल जिले के सवना स्थित ग्रामीण अस्पतालों में एंबुलेंस सेवा, पेयजल व्यवस्था, सुरक्षा तथा मरीजों के परिवहन को लेकर गंभीर अनियमितताएं होने का आरोप नागरिकों ने लगाया है। ग्रामीण अस्पतालों में एंबुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद उनमें ईंधन की कमी के कारण उनका पूर्ण क्षमता से संचालन नहीं हो पा रहा है। इसके चलते मरीजों और प्रसूता महिलाओं को एंबुलेंस सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। परिणामस्वरूप मरीजों को निजी वाहनों से घर लौटना पड़ रहा है और इसके लिए आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। नागरिकों ने पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

नागरिकों के आरोप के अनुसार, सवना ग्रामीण अस्पताल में शिवाजी गावंडे नामक चालक द्वारा सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने अथवा उसमें ईंधन नहीं होने का कारण बताकर प्रसूता महिलाओं सहित अन्य मरीजों को अपनी निजी वाहन से शुल्क लेकर ले जाने का आरोप लगाया गया है। संबंधित चालक सरकारी सेवा में रहते हुए भी निजी वाहन का इस्तेमाल कर आर्थिक लाभ उठा रहा है, ऐसी चर्चा सवना ग्रामीण अस्पताल परिसर में मरीजों के परिजनों के बीच है।सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संबंधित चालक की कार्यप्रणाली, एंबुलेंस सेवा, ईंधन खर्च तथा निजी वाहन से मरीजों को ले जाने के आरोपों की गहन जांच करने की मांग की है।

प्रसूता और मरीज परेशान

जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ऐसी मांग की गई है। साथ ही महागांव और सवना ग्रामीण अस्पतालों में आवश्यक मनुष्यबल, चालक, सुरक्षा रक्षक तथा अन्य मूलभूत सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। शिवाजी गावंडे वाहन संगठन के अध्यक्ष होने का फायदा उठाकर मनमाना कारभार कर रहे हैं, ऐसा आरोप लगाया जा रहा है। सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए आए मरीजों को अपनी निजी वाहन से ले जाकर उनसे खुलेआम शुल्क वसूलने का आरोप भी नागरिकों द्वारा लगाया गया है। संबंधित कर्मचारी के कारण मरीजों को होने वाली आर्थिक परेशानी को दूर करने के उद्देश्य से जिला चिकित्सक के पास शिकायत की गई है।

शव ले जाने के लिए भी नहीं मिली एंबुलेंस

दो दिन पहले माहूर तहसील के कुपटी निवासी एक मरीज को उमरखेड से उपचार के बाद महागांव ग्रामीण अस्पताल में स्थानांतरित किया गया था। इस दौरान महागांव में उसकी मृत्यु हो गई। आरोप है कि महागांव अस्पताल में मरीज की उचित रूप से नोंद भी नहीं ली गई। इस संबंध में कर्मचारियों द्वारा माध्यमों को टालमटोल वाले जवाब दिए जाने की बात सामने आई है। मृतक का शव उसके घर भेजने के लिए अस्पताल में एंबुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद वह नहीं मिलने का आरोप है। परिणामस्वरूप रात करीब दो बजे परिजनों को अपने घर से निजी वाहन बुलाकर शव ले जाने की नौबत आई। मरीजों और मृतकों के परिजनों को हो रही इस परेशानी को देखते हुए जिला चिकित्सक द्वारा ग्रामीण अस्पतालों में एबुलेंस सेवा प्रभावी रूप से उपलब्ध कराने की मांग जोर पकड़ रही है।

ECI-SIR Row Live: मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन, हिरासत में लिए गए कई बड़े नेता

SIR Row: इधर विपक्ष मांग रहा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, उधर BJP ने बताया पद्म भूषण का हकदार

PM मोदी की मॉर्फ्ड फोटो विवाद पर हाई कोर्ट का एक्शन, Meta से आपत्तिजनक कंटेंट हटाने को कहा; CJP को भी नोटिस

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, SIR के फैसलों को गैरकानूनी घोषित करने की मांग

बृजभूषण केस में नया मोड़! पहलवानों ने फिर खटखटाया कोर्ट का दरवाजा, निचली अदालत के फैसले को चुनौती