Babaji Date Mahila Sahakari Bank Scam: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में एक बड़े वित्तीय घोटाले के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की मुंबई जोनल टीम ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत यवतमाल के 9 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई बाबाजी दाते महिला सहकारी बैंक में हुए 242 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले से जुड़ी हुई है।
यह मामला बाबाजी दाते महिला सहकारी बैंक लिमिटेड के पूर्व प्रबंधकों, कर्मचारियों और कुछ बड़े कर्जदारों से संबंधित है। बैंक में जमाकर्ताओं के पैसों के दुरुपयोग और धोखाधड़ी की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने बैंक का विशेष ऑडिट कराया था।
ऑडिट रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर धांधली और अनियमितताओं का खुलासा होने के बाद यवतमाल के अवधूतवाड़ी पुलिस स्टेशन में कई अलग-अलग FIR दर्ज की गई थीं। इन्हीं एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर अपनी जांच शुरू की।
बाबाजी दाते महिला सहकारी बैंक लिमिटेड, यवतमाल महाराष्ट्र सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 9(1) के तहत रजिस्टर्ड बैंक था। बैंक में धोखाधड़ी और जमा पैसों के दुरुपयोग की कई शिकायतें मिलने के बाद राज्य सरकार ने इसका विशेष ऑडिट कराया था। ऑडिट में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ। इसके बाद आरबीआई ने साल 2022 में इस बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया था।
ऑडिट में पाया गया कि बैंक के सीईओ, चेयरपर्सन/चेयरमैन, डायरेक्टर्स और बैंक अधिकारियों ने कर्ज लेने वालों, वैल्यूअर और ऑडिटर्स के साथ मिलकर साजिश रची। उन्होंने बिना सही गारंटी और बिना कर्ज चुकाने की क्षमता जांचे ही लोन बांट दिए। इसके बाद लोन के पैसे को बैंक के नियमों और आरबीआई की गाइडलाइंस के खिलाफ डायवर्ट कर दिया गया।
जांच में सामने आया कि चेयरपर्सन और बैंक अधिकारियों ने कर्ज लेने वालों के साथ मिलकर 242 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की है। ईडी की जांच में बैंक अधिकारियों और कर्जदारों की मिलीभगत का पता चला है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) को जांच में पता चला कि कर्जदारों ने लोन के पैसे को निजी कामों के लिए इस्तेमाल किया, कैश में निकाला और पुराने लोन को नए लोन से चुकाने (एवरग्रीनिंग) में लगाया। इतना ही नहीं, इस पैसे का एक हिस्सा बैंक अधिकारियों के खातों में किकबैक के तौर पर भी ट्रांसफर किया गया। ईडी ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है।