Nagpur PM Appeal Gold Purchase Women Reaction: नागपुर प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में दिए गए उस बयान पर चर्चा तेज हो गई है जिसमें उन्होंने देशवासियों से एक साल तक सोना की खरीदारी से बचने की अपील की है। इस मुद्दे पर महिलाओं ने अपनी अलग अलग प्रतिक्रियाएं दीं लेकिन अधिकांश महिलाओं का है। कहना है कि भारतीय परंपरा और भावनाओं से जुड़ा सोना खरीदना बंद करना संभव नहीं महिलाओं के अनुसार सोना केवल आभूषण नहीं बल्कि हमारी पारंपरिक बचत और सुरक्षा का प्रतीक है जिसे शादियों में अनिवार्य माना जाता है।
जिन परिवारों में शादियां तय हैं वे अचानक खरीदारी बंद करने की अपील से चिंतित हो गये क्योंकि सोना खरीदना एक बड़ी योजना का हिस्सा होता है। वहीं कुछ लोगों ने चिंता जताई है कि इससे सराफा व्यापारियों और इस उद्योग से जुड़े कारीगरों के व्यवसाय पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण परिषद (जीजेसी) के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा कि प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से एक करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देने वाले रत्न एवं आभूषण उद्योग पर प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा हम सोने की जिम्मेदारी से खपत करने संबंधी प्रधानमंत्री की अपील को समझते हैं, यह बढ़ते आयात और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव की व्यापक राष्ट्रीय चिंता को दर्शाती है लेकिन भारत में पहले से ही हजारों टन सोना घरों में रखा हुआ है। ऐसे में समाधान केवल सोने की मांग घटाने में नहीं बल्कि स्वर्ण मौद्रीकरण योजना। जीएमएस) के जरिये मौजूदा सोने के उपयोग में है।
रोकड़े कहते हैं कि ज्वेलरी इंडस्ट्री केवल सोना-चादी या डायमंड तक सीमित नहीं है बल्कि इसके साथ अनेक सपोटिंग इंडस्ट्रीज जुड़ी हुई है जो लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान करती है। तथा देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ज्वेलरी इंडस्ट्री वास्तव में एक विशाल इकोसिस्टम है जिसके माध्यम से देश में रोजगार, व्यापार, निर्यात और आर्थिक विकास को निश्तर गति मिलती है।