सोना खरीदारी,(सोर्स: सोशल मीडिया) 
महाराष्ट्र

'सोना सिर्फ गहना नहीं', PM की अपील से सराफा बाजार में चिंता, नागपुर की महिलाओं की इस दो टूक राय

Nagpur Gold Purchase: प्रधानमंत्री की सोना खरीद टालने की अपील पर नागपुर की महिलाओं ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी। कई महिलाओं ने इसे परंपरा, बचत और शादी से जुड़ा जरूरी हिस्सा बताया।

अंकिता पटेल

Nagpur PM Appeal Gold Purchase Women Reaction: नागपुर प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में दिए गए उस बयान पर चर्चा तेज हो गई है जिसमें उन्होंने देशवासियों से एक साल तक सोना की खरीदारी से बचने की अपील की है। इस मुद्दे पर महिलाओं ने अपनी अलग अलग प्रतिक्रियाएं दीं लेकिन अधिकांश महिलाओं का है। कहना है कि भारतीय परंपरा और भावनाओं से जुड़ा सोना खरीदना बंद करना संभव नहीं महिलाओं के अनुसार सोना केवल आभूषण नहीं बल्कि हमारी पारंपरिक बचत और सुरक्षा का प्रतीक है जिसे शादियों में अनिवार्य माना जाता है।

जिन परिवारों में शादियां तय हैं वे अचानक खरीदारी बंद करने की अपील से चिंतित हो गये क्योंकि सोना खरीदना एक बड़ी योजना का हिस्सा होता है। वहीं कुछ लोगों ने चिंता जताई है कि इससे सराफा व्यापारियों और इस उद्योग से जुड़े कारीगरों के व्यवसाय पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

ज्वेलरी इंडस्ट्री से जुड़ीं प्रमुख सपोर्टिंग इंडस्ट्रीज

  • गोल्ड एवं प्रेसियस मेटल रिफाइनिंग इंडस्ट्री।
  • डायमंड एवं जेमस्टोन प्रोसेसिंग इंडस्ट्री।
  • बुलियन ट्रेडिंग एवं सप्लाई सेक्टर।
  • ज्वेलरी मशीनरी मैन्युफैक्चरिन इंडस्ट्री।
  • टूल्स एवं इक्विपमेंट सप्लायर्स।
  • हॉलमार्किंग एवं असेइम सर्विसेस।
  • पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग इंडस्ट्री।
  • सिक्योरिटी एवं सर्विलांस इंडस्ट्री।
  • लॉजिस्टिक्स एवं हाई-वैल्यू कूरियर सर्विसेस।
  • सीएडी सीएएम व ज्वेलरी डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री।
  • कास्टिंग एवं इलेक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्री।
  • बैंकिंग एवं फाइनेंस सेक्टर।
  • इंश्योरेंस इंडस्ट्री।
  • रिटेल डिस्ले व शोरूम इंटीरियर इंडस्ट्री।
  • ई-कॉमर्स एवं डिजिटल मार्केटिंग सेक्टर।
  • स्किल डेवलपमेंट व ट्रेनिंग इस्टीट्यूट्स।
  • ट्रेड एसोसिएशन्स व एग्जिबिशन इंडस्ट्री।
  • आईटी व ईआरपी संफ्टिवेयर प्रोवाइडर्स।
  • गोल्ड एवं सिल्वर कॉइन मिटिंग इंडस्ट्री।
  • रीसाइक्लिंग एवं स्क्रैप रिकवरी इंडस्ट्री।

1 करोड़ लोगों को देता है रोजगार

अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण परिषद (जीजेसी) के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा कि प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से एक करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देने वाले रत्न एवं आभूषण उद्योग पर प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा हम सोने की जिम्मेदारी से खपत करने संबंधी प्रधानमंत्री की अपील को समझते हैं, यह बढ़ते आयात और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव की व्यापक राष्ट्रीय चिंता को दर्शाती है लेकिन भारत में पहले से ही हजारों टन सोना घरों में रखा हुआ है। ऐसे में समाधान केवल सोने की मांग घटाने में नहीं बल्कि स्वर्ण मौद्रीकरण योजना। जीएमएस) के जरिये मौजूदा सोने के उपयोग में है।

अनेक सपोर्टिंग इंडस्ट्रीज जुड़ीं हैं ज्वेलरी उद्योग से

रोकड़े कहते हैं कि ज्वेलरी इंडस्ट्री केवल सोना-चादी या डायमंड तक सीमित नहीं है बल्कि इसके साथ अनेक सपोटिंग इंडस्ट्रीज जुड़ी हुई है जो लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान करती है। तथा देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ज्वेलरी इंडस्ट्री वास्तव में एक विशाल इकोसिस्टम है जिसके माध्यम से देश में रोजगार, व्यापार, निर्यात और आर्थिक विकास को निश्तर गति मिलती है।

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