वर्धा जिला परिषद स्कूल (सोर्सः सोशल मीडिया)
वर्धा

Wardha News: वर्धा में 332 शिक्षक पद रिक्त, बच्चों को सरकारी स्कूलों से निकालने को मजबूर अभिभावक

Wardha Teacher Vacancies: वर्धा जिले की जिला परिषद स्कूलों में शिक्षकों के 332 पद रिक्त हैं। शिक्षकों की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

आंचल लोखंडे

Wardha Zilla Parishad Schools: एक ओर सरकारसरकारी स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने और शिक्षा का स्तर मजबूत करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिले की जिला परिषद स्कूलों में शिक्षकों के सैकड़ों पद रिक्त होने से अध्यापन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। शिक्षकों की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई अभिभावक शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के चलते अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों से निकालकर अन्य स्कूलों में दाखिला दिला रहे हैं।

वर्धा जिले में जिला परिषद के प्राथमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत लगभग 902 स्कूल संचालित हैं। इन स्कूलों के लिए कुल 2 हजार 489 शिक्षकों के पद मंजूर हैं। इसके मुकाबले वर्तमान में केवल 2 हजार 157 शिक्षक कार्यरत हैं। इस तरह जिले में 332 शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। इन रिक्त पदों में मुख्याध्यापक के साथ-साथ विभिन्न विषयों के शिक्षकों के पद भी शामिल हैं।

ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था प्रभावित

जिले के कुछ ग्रामीण स्कूलों में स्थिति और भी गंभीर है। कई स्कूलों में कक्षा पहली से चौथी तक के विद्यार्थियों के लिए केवल दो शिक्षक ही उपलब्ध हैं। इन शिक्षकों को अध्यापन के साथ विभागीय बैठकों में भाग लेने, स्कूल की रिपोर्ट तैयार करने, पोषण आहार योजना की निगरानी सहित विभिन्न गैर-शैक्षणिक कार्य भी करने पड़ते हैं।

इसके अलावा सरकार की एसआईआर मुहिम में भी शिक्षकों की सेवाएं ली जा रही हैं। पहले से ही शिक्षकों की कमी और उस पर अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण शिक्षकों पर काम का बोझ बढ़ गया है। शिक्षकों का कहना है कि पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध नहीं होने से विद्यार्थियों को अपेक्षित शैक्षणिक मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। इसका असर सरकारी स्कूलों के शैक्षणिक परिणाम और विद्यार्थियों की संख्या पर भी पड़ रहा है।

'संचमान्यता नीति का परिणाम'

महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति के राज्याध्यक्ष विजय कोंबे ने कहा कि, जिला परिषद की प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों के कारण अध्यापन कार्य प्रभावित हो रहा है। संचमान्यता नीति के परिणामस्वरूप शिक्षक संख्या कम हुई है और उसमें रिक्त पदों की स्थिति ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। अनेक अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूलों से निकाल लिया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र की स्कूलों के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है।

स्कूलों के अस्तित्व पर संकट

ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी के साथ ही स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की समस्याएं भी सामने आ रही हैं। इन परिस्थितियों के कारण कई अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने से कतरा रहे हैं। विद्यार्थियों की संख्या कम होने से आने वाले समय में कुछ स्कूलों के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। सरकार द्वारा शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के दावे के बीच शिक्षकों के रिक्त पदों को तत्काल भरने और स्कूलों में आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग जोर पकड़ रही है।

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