Man Brave Survives In Tiger Attack: वर्धा जिले में हिंगनघाट तहसील के धामनगांव (सातेफल) क्षेत्र में शनिवार दोपहर बकरियां चराने गए 55 वर्षीय गजानन सूर्यभानजी नागोसे पर अचानक बाघ ने हमला कर दिया।
बाघ के हमले से कुछ पल के लिए उनकी जान खतरे में पड़ गई, लेकिन नागोसे ने हिम्मत और सूझबूझ का परिचय देते हुए बाघ का प्रतिरोध किया। उनके जोर-जोर से चिल्लाने पर बाघ उन्हें छोड़कर जंगल की ओर भाग गया।
जानकारी के अनुसार, गजानन नागोसे सुबह करीब 10 बजे बकरियों को लेकर जंगल क्षेत्र में गए थे। दोपहर करीब 1.30 बजे धामनगांव (सातेफल) तालाब के शिवारा परिसर में बकरियां चराते समय घात लगाए बैठे बाघ ने पीछे से उन पर झपट्टा मार दिया।
अचानक हुए हमले से नागोसे घबरा गए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बाघ से भिड़ गए। उन्होंने मदद के लिए जोर-जोर से आवाज लगाई। उनके प्रतिरोध और शोर से बाघ घबरा गया और उन्हें छोड़कर जंगल की ओर भाग निकला। हमले में नागोसे की जांघ, सिर और पीठ पर चोटें आई हैं।
बाघ के हमले में घायल गजानन सूर्यभानजी नागोसे को घटना के तुरंत बाद हिंगनघाट उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके जांघ, सिर और पीठ पर चोटें आई हैं, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण शुरू किया।
अधिकारियों ने हमले से जुड़े हालात और बाघ की गतिविधियों की जानकारी जुटाने का प्रयास किया। इस घटना के बाद धामनगांव (सातेफल) और आसपास के इलाकों में ग्रामीणों तथा पशुपालकों के बीच दहशत का माहौल है। लोग जंगल और खेतों की ओर अकेले जाने से बच रहे हैं।
ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। वहीं, नागोसे की हिम्मत और सूझबूझ की क्षेत्र में चर्चा हो रही है। उनके साहस और समय पर किए गए प्रतिरोध के कारण बाघ उन्हें छोड़कर भाग गया और उनकी जान बच गई।