वर्धा जिले में बारिश की कमी से सूखे की कगार पर खड़ी खरीफ फसलें सोर्स: सोशल मीडिया
वर्धा

अल नीनो का कहर: वर्धा पर मंडराया भीषण सूखा;सामान्य से 33.2% कम बारिश से जलस्रोत खाली, खरीफ फसलों पर असर

Wardha Rainfall Deficit: वर्धा में 22 सितंबर तक 553.2 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 33.2% कम है। जलसंचय में गिरावट और खरीफ फसलों पर असर के बीच सूखा घोषित करने की मांग उठी।

मनीषा बोंदरे

Wardha El Nino Impact Drought: वर्धा जिले में 22 सितंबर 2026 तक सामान्य से 33.2 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। जिले में अब तक 553.2 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 874.5 मिमी है।

बारिश की कमी का असर खरीफ फसलों के साथ जलस्रोतों पर भी पड़ा है और सूखा घोषित करने की मांग उठ रही है।

वर्धा में सामान्य से 33.2% कम बारिश, सूखे की आहट

वर्धा अल नीनो की परिस्थितियों के बीच वर्धा जिले में इस वर्ष बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है। 22 सितंबर 2026 तक जिले में 553.2 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य वर्षा का केवल 66.8 प्रतिशत है। इस तरह जिले में सामान्य से 33.2 प्रतिशत बारिश कम हुई है।

जलसंचय भी घटा

बारिश के बीच लंबे अंतराल के कारण सोयाबीन, कपास समेत खरीफ फसलों पर इसका असर दिखाई देने लगा है। फसलों की उत्पादकता प्रभावित होने के साथ किसानों के सामने लागत निकालने की चुनौती भी खड़ी हो गई है। बारिश की स्थिति को देखते हुए जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग भी उठ रही है।

अगस्त में सबसे कम बारिश

जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, जून से सितंबर तक वर्धा जिले में सामान्य बारिश 874.5 मिमी होती है। इस वर्ष अब तक केवल 553.2 मिमी बारिश हुई है।

अगस्त में स्थिति सबसे गंभीर रही। इस महीने सामान्य 271.6 मिमी बारिश के मुकाबले केवल 60.6 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य का महज 22.3 प्रतिशत है। वहीं वर्ष 2025 में जून से सितंबर के दौरान जिले में 955 मिमी बारिश दर्ज की गई थी।

हिंगणघाट में सबसे ज्यादा कमी

तहसीलवार आंकड़ों के अनुसार, हिंगणघाट में सामान्य की तुलना में केवल 49.1 प्रतिशत बारिश दर्ज हुई है। इसे तीव्र वर्षा कमी की श्रेणी में रखा गया है।

अन्य तहसीलों में आर्वी में 73.3 प्रतिशत, आष्टी में 80.6, वर्धा में 78.4, सेलू में 67, देवली में 73 और समुद्रपुर में 66.1 प्रतिशत बारिश हुई है। कारंजा में सबसे अधिक 86.6 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई।

जिले के 55 राजस्व मंडलों में से 15 मंडलों में 75 प्रतिशत से अधिक, 35 में 50 से 75 प्रतिशत और 5 मंडलों में 50 प्रतिशत से कम बारिश हुई है।

जलसंचय में भी बड़ी गिरावट

बारिश की कमी का असर जिले के जलस्रोतों पर भी दिखाई दे रहा है। प्रमुख और मध्यम परियोजनाओं में वर्तमान में 78.94 प्रतिशत जलसंचय है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 96 प्रतिशत था।

लघु सिंचाई परियोजनाओं में जलसंचय 68 प्रतिशत है, जो पिछले वर्ष के 98.95 प्रतिशत की तुलना में काफी कम है।

मदन उन्नई में सिर्फ 8.96% पानी

प्रमुख परियोजनाओं में बोर में 78.92, निम्न वर्धा में 82.42, धाम में 73.60, पोथरा में 99.97, पंचधारा में 46.17, डोंगरांत्र में 57.55, मदन में 38.10, मदन उन्नई में केवल 8.96 प्रतिशत, लाल नाला में 82.38 और वर्धा-कार नदी परियोजना में 81.19 प्रतिशत जलसंचय दर्ज किया गया है।

सकुली लघु परियोजना में 54.92 प्रतिशत जलसंचय है। जिले के बाहर स्थित नांद परियोजना में 82.47, वडगांव में 60.29, ऊर्ध्व वर्धा धरण में 58.90 और बेंबला परियोजना में 68.54 प्रतिशत जलसंचय दर्ज हुआ है।

सोयाबीन-कपास की उत्पादकता प्रभावित

बारिश में कमी और लंबे अंतराल का सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ा है। सोयाबीन और कपास सहित अन्य फसलों की उत्पादकता प्रभावित होने लगी है। किसानों के अनुसार, कई क्षेत्रों में उत्पादन इतना कम रहने की आशंका है कि खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है।

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