वर्धा जिलाधिकारी कार्यालय (सोर्स- सोशल मीडिया)  
वर्धा

वर्धा जिलाधिकारी कार्यालय पर कुर्की की नौबत, 2.76 लाख रुपये बकाया मुआवजे के आश्वासन से मामला टला

Wardha Court Order News: वर्धा में राष्ट्रीय राजमार्ग भूमि अधिग्रहण मुआवजा विवाद के चलते कलेक्टर कार्यालय की कुर्की की कार्रवाई तय थी, लेकिन प्रशासन के आश्वासन के बाद मामला फिलहाल टल गया।

केतकी मोडक

Wardha Land Acquisition Compensation Case: राष्ट्रीय राजमार्ग (नेशनल हाईवे) के लिए अधिग्रहित की गई कृषि भूमि का निर्धारित मुआवजा समय पर न मिलने के कारण सोमवार, 29 जून को वर्धा जिलाधिकारी (कलेक्टर) कार्यालय पर कुर्की की कार्रवाई की नौबत आ गई। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में अदालत के कर्मचारी और संबंधित पीड़ित किसान जब सीधे कुर्की की कार्रवाई के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे, तो पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया।

हालांकि, जिला प्रशासन द्वारा बकाया राशि उपलब्ध होते ही तत्काल भुगतान करने का लिखित एवं मौखिक आश्वासन दिए जाने के बाद किसान ने कुर्की की कार्रवाई को फिलहाल स्थगित करने पर सहमति जताई, जिससे जिलाधिकारी कार्यालय की होने वाली यह कुर्की टल गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलगांव निवासी सुधीरकुमार आनंदप्रसाद पांडे की कृषि भूमि वर्ष 2005 में नागपुर-औरंगाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई थी। अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान वर्ष 2007 में प्रशासन द्वारा उन्हें मात्र 36 हजार रुपये का मुआवजा दिया गया था। इस मुआवजे को अत्यंत कम बताते हुए उन्होंने वर्धा जिला अदालत में याचिका दायर की थी।

मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद जिला न्यायालय ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रति एकड़ एक लाख रुपये तथा 30 हजार रुपये अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया था।

इस निर्णय के अनुसार किसान को ब्याज सहित कुल 7.04 लाख रुपये मिलने थे, लेकिन प्रशासन ने केवल 4 लाख 28 हजार 339 रुपये का ही भुगतान किया। इसके बाद शेष राशि की मांग को लेकर किसान ने नागपुर उच्च न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया, लेकिन तकनीकी कारणों से वहां उनकी याचिका खारिज कर दी गई।

इसके बावजूद, वर्धा जिला न्यायालय के मूल आदेश के अनुसार प्रशासन को अभी भी 2 लाख 76 हजार रुपये का बकाया भुगतान करना शेष था, जो लंबे समय तक नहीं किया गया। बार-बार चक्कर काटने के बाद भी जब शेष मुआवजा नहीं मिला, तो सुधीरकुमार पांडे ने पुनः वर्धा की दीवानी (सिविल) अदालत में निष्पादन (एक्जीक्यूशन) याचिका दायर की।

अदालत ने जारी किया था जंगम संपत्ति की कुर्की का वारंट

मामले की गंभीरता को देखते हुए दीवानी अदालत ने जिला प्रशासन के खिलाफ जंगम (चल) संपत्ति कुर्की का वारंट जारी कर दिया। अदालत के इसी कड़े आदेश के तहत सोमवार सुबह करीब 11 बजे पीड़ित किसान सुधीरकुमार पांडे, न्यायालय के बेलिफ (अदालती कर्मचारी) वी. डी. महल्ले तथा यास्मीन अंसारी कुर्की की आधिकारिक कार्रवाई को अंजाम देने के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे।

कलेक्ट्रेट में न्यायालयीन वारंट लेकर कर्मचारियों के पहुंचने की सूचना मिलते ही अधिकारियों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसके तुरंत बाद जिला कलेक्टर कार्यालय के भू-संपादन (लैंड एक्विजिशन) विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और पीड़ित किसान के बीच एक आपातकालीन बैठक हुई।

अधिकारियों के आश्वासन के बाद बदला निर्णय

चर्चा के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने किसान को आश्वस्त किया कि संबंधित निर्माण विभाग से तत्काल आवश्यक वित्तीय निधि (फंड) की मांग की जाएगी तथा शासन से राशि प्राप्त होते ही उनके 2.76 लाख रुपये के शेष मुआवजे का तत्काल भुगतान कर दिया जाएगा। प्रशासन के इस ठोस लिखित एवं मौखिक आश्वासन पर भरोसा जताते हुए किसान ने फिलहाल कुर्की की कार्रवाई को रोकने पर सहमति दे दी।

इसके परिणामस्वरूप, जिलाधिकारी कार्यालय पर होने वाली कुर्की की यह ऐतिहासिक कार्रवाई अंतिम समय में टल गई और जिला प्रशासन ने बड़ी राहत की सांस ली।

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