Bakli River Flood: लगातार हुई बारिश के बाद बाकली नदी में आए भीषण उफान से बेलोरा खुर्द गांव जलमग्न हो गया। बाढ़ का पानी गांव में घुसने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। वहीं गांव से सटे हरिषवाड़ा का संपर्क भी पूरी तरह टुट गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बाकली नदी के गहरीकरण का कार्य समय पर पूरा नहीं होने के कारण हर वर्ष उन्हें इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है।
बाढ़ के कारण गांव के संपर्क मार्ग पानी में डूब गए हैं, जिससे विद्यार्थियों, मरीजों और नौकरीपेशा लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवार घरों में ही फंस गए हैं और लोगों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ रहा है। नदी किनारे स्थित खेतों में बाढ़ का पानी भर जाने से खड़ी फसलें पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं। किसानों का कहना है कि पहले ही मौसम की मार झेल रहे कृषि क्षेत्र को अब बाढ़ ने भी भारी नुकसान पहुंचाया है। इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट और गहरा गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ आने के बाद शासन द्वारा राहत और सहायता की घोषणाएं तो की जाती हैं, लेकिन वास्तविक मदद बहुत कम लोगों तक ही पहुंच पाती है। अनेक प्रभावित परिवार राहत से वंचित रह जाते हैं, जिससे उनमें नाराजगी बढ़ रही है। बेलोरा खुर्द और आसपास के गांवों के नागरिकों ने शासन से बाकली नदी के गहरीकरण कार्य में हुई देरी की जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा बाढ़ से प्रभावित किसानों और ग्रामीणों को शीघ्र पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि हर वर्ष नदी के गहराईकरण और स्थायी समाधान के लिए घोषणाएं तो की जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम समय पर पूरा नहीं होता। यदि नदी के गहराईकरण का कार्य पहले ही पूरा कर लिया गया होता तो इस स्थिति से काफी हद तक बचा जा सकता था।