एक्सिस बैंक (सौजन्य-सोशल मीडिया, कंसेप्ट फोटो) 
वर्धा

Axis Bank में 7 सालों से चल रहे गोरखधंधे का पर्दाफाश, ऑफिसरों के फर्जी स्टांप बरामद, पुलिस भी हैरान

Axis Bank Fraud: एक्सिस बैंक में बैंक लोन मामले में चल रही धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। इस खुलासे की तह तक पहुंचने के बाद पुलिस भी हैरान रह गई। ये गोरखधंधा पिछले 7 सालों से चलाया जा रहा था।

प्रिया जैस

Bank Loan Fraud: वर्धा जिले के एक्सिस बैंक की वर्धा शाखा में सामने आए लोन फ्रॉड मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा की पुलिस कर रही है। जांच के दौरान आरोपी रविंद्र गोमासे के अमरावती स्थित घर पर छापा मारा गया। छापेमारी के दौरान पुलिस को जो सामग्री बरामद हुई, उसने सभी को चौंका दिया। पुलिस ने वहां से सरकारी अधिकारियों, विभिन्न बैंकों और स्कूलों के मुख्याध्यापकों के नाम से बनाए गए फर्जी स्टांप बरामद किए।

उल्लेखनीय है कि एक्सिस बैंक वर्धा शाखा से 20 लोगों के नाम पर कुल 2.55 करोड़ का लोन उठाया गया था। इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड अमरावती निवासी अनंता इंगले और अनूप बन्सोड बताया जा रहा है। इनके लिए एजेंट के रूप में काम करने वाले आरोपी रविंद्र गोमासे और कमलेश धोटे को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों फिलहाल 22 सितंबर तक पुलिस हिरासत में हैं।

43 प्रकार की सामग्री जब्त

ईओडब्ल्यू की टीम ने अमरावती स्थित रविंद्र के फ्लैट पर छापा मारकर उसे कब्जे में लिया। तलाशी के दौरान 43 प्रकार की सामग्री जब्त की गई, जिसमें फर्जी स्टांप, बैंक स्टेटमेंट, आधार कार्ड, कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर सहित विभिन्न फर्जी दस्तावेज शामिल थे। फर्जी दस्तावेज और स्टांप इसी फ्लैट में तैयार किए जाते थे।

सीईओ और आयुक्तों के नाम से बने थे फर्जी स्टांप

पुलिस को जिन फर्जी स्टांप की बरामदगी हुई है, उनमें अमरावती जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, आर्वी के आरोग्य अधिकारी, अमरावती मनपा के आयुक्त और विभिन्न स्कूलों के मुख्याध्यापकों के नाम से स्टैम्प पाये गए़ इसके अलावा, लगभग सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों और उनकी शाखाओं के नाम से भी फर्जी स्टांप बनाए गए थे। अनूप बन्सोड के घर से भी 32 प्रकार की संदिग्ध सामग्री जब्त की गई है। जानकारी के अनुसार यह गोरखधंधा पिछले 7 वर्षों से चल रहा था और इस दौरान करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई है। फिलहाल पुलिस अनूप बन्सोड और अनंता इंगले की तलाश कर रही है।

खुद को बताया कॉलेज प्राचार्य

ईओडब्ल्यू की जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आरोपी रविंद्र गोमासे, जो अमरावती जिला न्यायालय में बतौर अटॉर्नी सेवा दे रहा था, उसने बैंक से लोन लेने के लिए खुद को प्रियदर्शिनी कॉलेज का प्राचार्य बताया था। अपना वेतन 91 हजार रुपए दिखाया़ उसने इस कॉलेज का फर्जी स्टांप तैयार कर जाली दस्तावेजों के माध्यम से लोन प्राप्त किया।

यह गिरोह ऐसे ही फर्जी स्टांप के जरिए कई लोगों को सरकारी विभाग, स्कूल या कॉलेज का कर्मचारी बताकर उनके नाम पर लोन उठाता था। इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के दौरान कुछ बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता भी सामने आने की संभावना है। इस दिशा में आर्थिक अपराध ब्रांच गंभीरता से जांच कर रही है।

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