प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया) 
वर्धा

आर्वी पंचायत समिति में मनरेगा घोटाला, 70 लाख की हेरा-फेरी मामले में पुलिस ने लिया एक्शन

Wardha News: वर्धा की आर्वी पंचायत समिति में मनरेगा निधि के 70 लाख रुपये से अधिक गबन का मामला उजागर हुआ। जांच में महिला हिरासत में, BDO को तलब किया गया। पुलिस ने फौजदारी कार्रवाई शुरू की।

आकाश मसने

Arvi Panchayat Samiti MNREGA Fund Scam: वर्धा जिले की आर्वी पंचायत समिति में घटी मनरेगा निधि गबन की जांच में 26 नवंबर को अंततः फौजदारी कार्रवाई की गई। इस प्रकरण में आर्वी पुलिस ने एक महिला को हिरासत में लिया और उससे पूछताछ शुरू की।

जानकारी के अनुसार, ऑनलाइन प्रणाली में दक्ष आर्वी पंचायत समिति के मनरेगा सहायक कार्यक्रम अधिकारी प्रणाली कसर ने स्वयं और अपने निकटवर्तीयों को बड़ा आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी निधि का गबन किया था। इस मामले की शिकायत जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पराग सोमण के पास दर्ज कराई गई थी। शुरुआती जांच आर्वी की गटविकास अधिकारी सुनीता मरसकोल्हे ने की।

प्रारंभिक जांच में लगभग 25 लाख 28 हजार 319 रुपये की सरकारी निधि के गबन का मामला सामने आया। इसके बाद जब प्रणाली कसर ने संबंधित राशि जमा नहीं की, तो जि।प। के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पराग सोमण ने उन्हें बर्खास्त कर दिया।

इस प्रकरण की गहन जांच के लिए एक जिलास्तरीय समिति गठित की गई। समिति ने अपने रिपोर्ट में खुलासा किया कि कुल 70 लाख रुपये से अधिक की सरकारी निधि का गबन किया गया था। इसके आधार पर पराग सोमण ने आर्वी के गटविकास अधिकारियों को फौजदारी कार्रवाई के लिए निर्देश दिए।

26 नवंबर को आवश्यक कागजात मिलने के बाद आर्वी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की। इसी दौरान पुलिस ने प्रकरण से संबंधित एक महिला को हिरासत में लिया और उससे पूछताछ शुरू की।

पुलिस ने BDO को भी पूछताछ के लिए बुलाया

आर्वी पंचायत समिती में मनरेगा निधि गबन प्रकरण में आर्वी पुलिस ने गटविकास अधिकारी सुनीता मरसकोल्हे को आवश्यक जानकारी के लिए बुलाया गया है। हालांकि, दोपहर तक वह पुलिस स्टेशन नहीं पहुंची। इस मामले में उनके लिए भी मुश्किल बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

आर्वी पुलिस करेगी आगे की जांच

जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पराग सोमण ने कहा कि प्रकरण की प्रारंभिक जांच में निधि के गबन का पता चला। इसके बाद गहन जांच के लिए जिलास्तरीय समिति गठित की गई, जिसने अपने रिपोर्ट में 70 लाख रुपये से अधिक की सरकारी निधि के गबन की जानकारी दी। इसी आधार पर मामला आगे की कार्रवाई के लिए आर्वी पुलिस को सौंपा गया।

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