Monsoon Infrastructure Failure Wardha: मानसून की पहली ही तेज बारिश ने वर्धा जिले में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर कारंजा तहसील के अजनादेवी गांव में निर्माणाधीन सीमेंट सड़क और पुल के कारण बारिश का पानी खेतों में घुसने से किसानों की फसल और कृषि भूमि को भारी नुकसान हुआ, वहीं दूसरी ओर शहर के इतवारा क्षेत्र स्थित रेलवे अंडरपास में जलभराव से आम नागरिकों का आवागमन प्रभावित हो गया। दोनों घटनाओं ने समय रहते आवश्यक व्यवस्थाएं नहीं किए जाने की पोल खोल दी है।
कारंजा तहसील के अजनादेवी गांव में आष्टी-नारा मार्ग पर निर्माणाधीन सीमेंट सड़क एवं पुल के कार्य में कथित लापरवाही के कारण बारिश का पानी खेतों में पहुंच गया। ग्रामीणों के अनुसार, पुल निर्माण के दौरान आवागमन के लिए बनाया गया वैकल्पिक मार्ग कार्य पूरा होने के बाद भी नहीं हटाया गया। वहीं नाले के किनारे बनी सुरक्षा दीवार भी पहले ही तोड़ दी गई थी। इसके चलते पहली ही तेज बारिश में नाले का प्राकृतिक जल प्रवाह बाधित हो गया और पानी खेतों की ओर मुड़ गया।
तेज बहाव के साथ बड़े पत्थर, मलबा और उपजाऊ मिट्टी खेतों में बहकर पहुंच गई। इससे हाल ही में की गई सोयाबीन और कपास की बुआई पूरी तरह नष्ट हो गई। प्रभावित किसानों में गजानन गुलाबराव वैद्य, हेमराज किसनाजी फरकाडे, धनराज किसनाजी फरकाडे तथा हरिभाऊ दसरत देवासे सहित कई किसानों का नाम सामने आया है। किसानों का कहना है कि उन्होंने एक दिन पहले ही बुआई की थी, जो पहली बारिश में ही बह गई।
प्रभावित किसानों ने प्रशासन से तत्काल नुकसान का पंचनामा कर उचित मुआवजा देने, संबंधित ठेकेदार की जिम्मेदारी तय करने, नाले की सुरक्षा दीवार का पुनर्निर्माण कराने और खेतों तक पहुंचने का रास्ता जल्द बहाल करने की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
इधर, मानसून की शुरुआत के साथ ही शहर के इतवारा और श्मशानभूमि परिसर स्थित रेलवे अंडरपास में मामूली बारिश के बाद भी भारी जलभराव की स्थिति बन गई है। वर्षों पुरानी इस समस्या का समाधान अब तक नहीं हो सका है, जिससे स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
इस अंडरपास से हिंदू श्मशानभूमि, मुस्लिम कब्रिस्तान, डॉ. जाकिर हुसैन कॉलोनी, अशोकनगर, तारफैल, सिद्धार्थनगर और टीपू सुलतान नगर सहित कई क्षेत्रों के हजारों लोग प्रतिदिन आवागमन करते हैं। वर्तमान में रेलवे की नई लाइन और पुल का निर्माण कार्य जारी है, लेकिन निर्माण के दौरान जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण अंडरपास में बारिश का पानी भर रहा है। इससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अंतिम संस्कार और जनाजे जैसी आवश्यक सेवाओं के दौरान भी लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
यह भी पढ़ें वर्धा के 13 गांवों में 21 हजार उपभोक्ताओं पर 40 करोड़ से अधिक पानी टैक्स बकाया, वसूली अभियान जारी
स्थिति को और गंभीर बनाते हुए अंडरपास के आसपास कीचड़ और कचरे का अंबार लग गया है। वर्धा नगर परिषद द्वारा कुछ समय पहले सफाई अभियान चलाया गया था, लेकिन अब सड़क किनारे फिर से कचरा फेंका जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, फल और मांस विक्रेताओं द्वारा प्रतिदिन निकलने वाला कचरा खुले में फेंका जा रहा है, जिससे गंदगी बढ़ रही है। वहीं अंडरपास के भीतर फैले कीचड़ के कारण वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों और किसानों ने प्रशासन से दोनों मामलों में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि बारिश के मौसम की शुरुआत में ही सामने आई इन समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। फिलहाल इन दोनों मामलों में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।