Tiger Travel Tipeshwar To Dharashiv: महाराष्ट्र के वन्यजीव इतिहास में एक न अध्याय जुड़ गया है। यवतमाल स्थित टिपेश्वर वन्यजीव अभयारण्य से निकला एक युवा बाघ अपने स्थायी प्राकृतिक ठिकाने की तलाश में पिछले दो वर्षों से मध्य महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में भटक रहा है। इस दौरान बाघ ने करीब 400 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की है और बीड, लातूर, सोलापुर तथा अहिल्यानगर जैसे घनी मानव आबादी वाले जिलों से गुजरते हुए अब धाराशिव जिले में दाखिल हो चुका है।
वन विभाग के मुताबिक महाराष्ट्र में एक बाघ अपने स्थायी ठिकाने की तलाश में पिछले दो वर्षों से राज्य के पांच जिलों में सफर कर रहा हैं। यह बाघ मध्य महाराष्ट्र के पांच जिलें बीड, लातूर, धाराशिव, सोलापुर और अहिल्यानगर होकर गुजरा हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, बाघ का इतने लंबे इलाके में सुरक्षित रूप से घूमना और नए क्षेत्रों में ठहरना क्षेत्र के बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र, पर्याप्त शिकार और जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत है। यह यात्रा पांच अलग-अलग प्रशासनिक क्षेत्र और मानव आबादी वाले क्षेत्र से होकर गुजरी हैं।
इतने व्यापक और मानव प्रभाविक इलाकों में इतनी लंबी दूरी पार करना और दो साल तक सुरक्षित बने रहना यह दर्शाता हैं कि बाघ में इंसानी बस्तियों से बचकर निकलने कि अद्भुत कला हैं।
वन विभाग के अनुसार, बाघ को पहली बार 10 दिसंबर 2025 और फिर 27 जुलाई 2026 को बीड जिले के आष्टी के पहाड़ी क्षेत्र में देखा गया था। इसके बाद 13 अगस्त को इंसानी बस्ती ब्रह्मगांव में एक मवेशी का शिकार किए जाने की घटना के बाद वन विभाग ने वहां 'कैमरा ट्रैप' लगाए। इन कैमरों में फिर से 7 दिन बाद 20 अगस्त को बाघ की गतिविधि रिकॉर्ड हुई।
आष्टी रेंज के वन अधिकारी अमोल मुंडे ने बताया कि करीब 10 दिनों तक उसकी कोई गतिविधि नजर नहीं आई। इसके बाद बाघ को एक बार फिर 29 अगस्त को धाराशिव जिले की वाशी तहसील के येसवंडी के पास देखा गया।
बाघ का लंबे समय तक टिके रहना इस बात का संकेत है कि वहां पर्याप्त शिकार और जल संसाधन मौजूद हैं। अधिकारियों के अनुसार किसी भी इलाके में बाघ की यह आवाजाही इस बात का ठोस प्रमाण भी है कि टिपेश्वर से धाराशिव स्थित येडशी-रामलिंग घाट अभयारण्य को जोड़ने वाला प्राकृतिक वन्यजीव गलियारा (Natural Wildlife Corridor) अब भी सक्रिय और प्रभावी है।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, येडशी क्षेत्र इस बाघ के बड़े आवासीय क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बन गया है। मुंडे ने कहा कि फिलहाल बाघ भूम और धाराशिव की सीमा के साथ तेरखेडा-येसवंडी इलाके में घूम रहा है और संभवतः नलदुर्ग तथा येडशी की ओर बढ़ रहा है। वन विभाग बाघ की हर स्थिती और सूरक्षा के लीए पैंनी नजर गढाएं बैंठे हुए हैं। ताकि उसे सुरक्षित रुप से अपना प्राक्रुतिक आवास मिल सकें।