Vasai Murder Case: पालघर जिले के वसई इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और दोस्ती के अटूट विश्वास को झकझोर कर रख दिया है। मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग के पास एक आम के बाग में बोरी में बंद एक बिना सिर का शव मिलने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। पुलिस की शुरुआती जांच में यह साफ हो गया कि यह हत्या किसी पेशेवर अपराधी ने नहीं, बल्कि मृतक के ही सबसे भरोसेमंद दोस्त ने अंजाम दी है। महज चंद रुपयों के लालच और व्यापारिक विवाद ने एक हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया और एक दोस्त को कातिल बना दिया।
सोमवार सुबह करीब 9 बजे पेल्हार पुलिस स्टेशन की सीमा के अंतर्गत यह वीभत्स शव बरामद हुआ था। शव की हालत इतनी खराब थी कि उसकी पहचान करना लगभग असंभव था, लेकिन मृतक के हाथ पर बने एक खास टैटू ने पुलिस के लिए सुराग का काम किया। टैटू के जरिए मृतक की पहचान अशोक सिंह राजपूत के रूप में हुई। पुलिस ने बिना समय गंवाए जांच की कमान संभाली और आधुनिक तकनीक व मैनुअल इंटेलिजेंस के मेल से महज 8 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी तक पहुँचने में सफलता हासिल की।
जांच के दौरान वसई पुलिस को पता चला कि अशोक सिंह राजपूत और मुख्य आरोपी दिनेशकुमार प्रजापति पुराने दोस्त थे। दोनों ने मिलकर वसई के जाबरपाड़ा इलाके में किराने की एक छोटी सी दुकान साझेदारी में शुरू की थी। उनका मकसद मेहनत कर अपना घर बसाना था, लेकिन कुछ ही समय में पैसों के लेन-देन को लेकर दोनों के बीच दरार आ गई। यह तनाव इस कदर बढ़ा कि दिनेशकुमार ने अपने ही साझेदार को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रच डाली। आरोपी ने न केवल अशोक की हत्या की, बल्कि पहचान छिपाने के लिए बेरहमी से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया।
दिनेशकुमार ने अपराध को छुपाने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया। उसने अशोक के धड़ को एक बोरी में भरकर हाईवे के पास फेंक दिया, जबकि सिर को खाणीवडे खाड़ी के किनारे झाड़ियों में छिपा दिया। आरोपी को लगा था कि सिर गायब होने से पुलिस कभी मृतक की पहचान नहीं कर पाएगी। हालांकि, पुलिस ने घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी फुटेज और संदिग्ध वाहनों की आवाजाही का बारीकी से विश्लेषण किया। इसी आधार पर पुलिस जाबरपाड़ा पहुँची और दिनेशकुमार को हिरासत में लिया, जिसके बाद इस पूरी साजिश की परतें खुलती चली गईं।
कड़ी पूछताछ के दौरान दिनेशकुमार ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और अपने साथी संदीप तिवारी का नाम भी उजागर किया। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने आधुनिक ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर इलाके का सर्च ऑपरेशन चलाया। ड्रोन की मदद से पुलिस ने झाड़ियों में छिपाया गया मृतक का सिर, मोबाइल फोन और हत्या में इस्तेमाल किए गए अन्य साक्ष्य बरामद किए। फॉरेंसिक टीम ने मौके से सभी सबूतों को वैज्ञानिक पद्धति से जब्त कर लिया है। वसई कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 10 अप्रैल 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है, जहाँ उनसे इस हत्याकांड के अन्य पहलुओं पर पूछताछ की जा रही है।