Uttan Dumping Ground Biomining Project Update: वर्षों से धुएं, दुर्गंध और प्रदूषण की मार झेल रहे भाईंदर पश्चिम के उत्तन डंपिंग ग्राउंड से अब शहरवासियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
मनपा ने बायोमाइनिंग तकनीक के जरिए यहां जमा करीब 10 लाख मीट्रिक टन कचरे में से 5 लाख मीट्रिक टन से अधिक कचरे का सफलतापूर्वक निपटान कर लिया है। प्रशासन ने दिसंबर 2026 तक पूरे डंपिंग ग्राउंड को पूरी तरह कचरा-मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है।
उत्तन के धवागी पहाड़ी क्षेत्र स्थित अपशिष्ट प्रसंस्करण केंद्र (घनकचरा प्रकल्प) के पास वर्षों से बिना प्रसंस्करण के कचरा जमा होता रहा, जिससे यहां कचरे के विशाल पहाड़ बन गए थे।
संयंत्र लंबे समय तक बंद रहने के कारण हालात और गंभीर हो गए थे। स्थानीय लोगों को धुएं, बदबू और प्रदूषण के चलते स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। डंपिंग ग्राउंड में लगने वाली आग से निकलने वाले धुएं के कारण सांस की बीमारियां बढ़ रही थीं, वहीं कचरे से निकलने वाला दूषित पानी खेतों तक पहुंचने से जमीन भी बंजर होने लगी थी।
इन समस्याओं के समाधान के लिए मनपा ने पुराने कचरे के निपटान हेतु बायोमाइनिंग परियोजना शुरू की थी, लेकिन शुरुआती ठेकेदार द्वारा काम अधूरा छोड़ने और नई निविदा प्रक्रिया में देरी के कारण यह योजना करीब 3 वर्षों तक अटकी रही। अगस्त में नई निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद मनपा ने काम तीन अलग-अलग संस्थाओं को सौंपा।