Thane Missing Person Found (सोर्स- नवभारत) 
ठाणे

अटूट प्रयास की जीत: 13 साल पहले सतना से लापता हुआ ग्रेजुएट युवक ठाणे के मनोरुग्णालय से पहुँचा अपने घर

Thane Missing Person Found News: ठाणे प्रादेशिक मनोरुग्णालय के डॉक्टरों की मेहनत से 13 साल पहले सतना से लापता हुआ एक ग्रेजुएट युवक अपने परिवार से मिल सका। वीडियो कॉल के जरिए परिजनों ने उसकी पहचान की

सूर्यप्रकाश मिश्र

Thane Regional Psychiatric Hospital News: मानसिक रूप से बीमार एक युवक जो 13 साल पहले मध्यप्रदेश के अपने घर से लापता होकर मुंबई आ गया था। वह फिर से अपने परिवार में पहुंच गया है। यह सम्भव हो पाया है,ठाणे के प्रादेशिक मनोरुग्णालय के डॉक्टरों और स्टाफ़ के संवेदनशील इलाज एवं प्रयास से।

 अस्पताल की मेहनत रंग लाई

बताया गया कि लगभग 13 साल पहले, अफ़ज़ल (बदला हुआ नाम), मानसिक रूप से बीमार युवक जो ग्रेजुएट था, वह अपने गांव से भटकते भटकते मुंबई आ गया। मुंबई के बांद्रा पुलिस स्टेशन की सीमा में घूमता हुआ मिला था। अत्यधिक खराब मानसिक स्थिति से वह अपने बारे में कोई जानकारी नहीं दे रहा था,

इसलिए पुलिस ने उसे पांच महीने पहले इलाज के लिए रीजनल साइकेट्रिक हॉस्पिटल, ठाणे में भर्ती कराया था। उस मरीज़ का इलाज हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. नेताजी मुलिक के मार्गदर्शन और साइकेट्रिस्ट डॉ. आशीष पाठक की देखरेख में किया गया।

शुरू में उसने अपने बारे में कोई साफ़ जानकारी नहीं दी। अस्पताल के सोशल सर्विस सुपरिटेंडेंट सतीश वाघ के अनुसार उसका पता ट्रेस करना मुश्किल था क्योंकि वह बांद्रा, दिल्ली और कभी मध्य प्रदेश या उत्तर प्रदेश जैसे अलग-अलग पते बताता था।

इसी बीच पिछले सप्ताह, इलाज और काउंसलिंग के दौरान उसने अपने गांव का नाम रामनगर, जिला सतना (मध्य प्रदेश) बताया। इस जानकारी के आधार पर, हॉस्पिटल ने तुरंत सतना ठाणे पुलिस स्टेशन से संपर्क किया और मरीज़ की जानकारी और फ़ोटो ऑफिसर विजय त्रिपाठी को भेजी। लोकल लेवल पर सर्च करने के बाद, मरीज़ के रिश्तेदारों को सिर्फ़ एक घंटे में ट्रेस कर लिया गया।

हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन ने रिश्तेदारों से वीडियो कॉल के ज़रिए मरीज़ की पहचान कन्फ़र्म की। उसके बाद, मरीज़ का भतीजा, भाभी और दूसरे रिश्तेदार तुरंत ठाणे पहुंचे इस मामले में डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ. प्राची चिवटे, सोशल सर्विस सुपरिटेंडेंट सतीश वाघ, साइकेट्रिस्ट नर्स मानसी दुखंडे, तेजस्विनी पवार और दूसरे स्टाफ ने काफी मेहनत की।

मित्र परिवार ने छोड़ दी थी उम्मीद

उस मरीज के दोस्त सलीम शेख ने बताया कि हम मित्र परिवार ने उसकी उम्मीद छोड़ दी थी। "अफजल पढ़ा-लिखा ग्रेजुएट है और उसे लिखने का बहुत शौक था। लेकिन बिगड़ती दिमागी हालत की वजह से वह अचानक घर छोड़कर चला गया। हमने उसे बहुत ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिला। हमने उम्मीद छोड़ दी थी। ठाणे रीजनल हॉस्पिटल ने अफजल के लिए जो प्यार और इंसानियत दिखाई, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता"।

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