ठाणे मनोरोग अस्पताल (सोर्सः सोशल मीडिया)
ठाणे

मनोरोग अस्पताल के 68 सफाई कर्मचारियों की लड़ाई रंग लाई, दोगुने जुर्माने के साथ खाते में बकाया वेतन राशि

Thane Cleaning Workers: ठाणे मनोरोग अस्पताल के 68 सफाई कर्मचारियों की करीब 2 साल की लड़ाई रंग लाई। 6 महीने के बकाया न्यूनतम वेतन अंतर की राशि दोगुने जुर्माने सहित करीब 58 लाख रुपए खातों में जमा किए।

सूर्यप्रकाश मिश्र, आंचल लोखंडे

Thane Mental Hospital: ठाणे के मनोरोग अस्पताल के 68 सफाई कर्मचारियों की करीब 2 साल से चल रही कानूनी और आंदोलनात्मक लड़ाई को आखिरकार सफलता मिली है। अस्पताल प्रशासन ने 6 महीने के वेतन अंतर की बकाया राशि, दोगुने जुर्माने सहित कर्मचारियों के बैंक खातों में जमा कर दी।

क्या था मामला

कर्मचारियों का आरोप था कि उन्हें न्यूनतम वेतन कानून के अनुसार वेतन नहीं दिया जा रहा था। इसके विरोध में श्रमिक जनता संघ यूनियन के नेतृत्व में पिछले करीब दो वर्षों से मोर्चे, धरना, प्रदर्शन और 28 दिनों के श्रृंखलाबद्ध उपवास जैसे आंदोलन किए गए। इसके साथ ही यूनियन ने ठाणे औद्योगिक न्यायालय में भी मामला उठाया था।

यूनियन के अनुसार अस्पताल प्रशासन और ठेकेदार मे. लोकराज्य स्वयंरोजगार सेवा सहकारी संस्था, पुणे द्वारा न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं किए जाने के बाद यूनियन के महासचिव जगदीश खैरालिया ने 68 कर्मचारियों के बकाया न्यूनतम वेतन अंतर की वसूली के लिए न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के तहत ठाणे श्रम उप आयुक्त कार्यालय में दावा दायर किया।

एक वर्ष चली प्रक्रिया

करीब एक वर्ष चली प्रक्रिया के बाद 10 दिसंबर 2025 को सहायक श्रम आयुक्त एवं न्यूनतम वेतन अधिनियम के तहत प्राधिकारी ने आदेश जारी किया। इसमें 6 महीने के बकाया वेतन अंतर की राशि पर दोगुना जुर्माना लगाते हुए कुल करीब 58 लाख रुपए का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। भुगतान नहीं होने पर मामला आगे बढ़ा और ठेकेदार ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया। यूनियन के मुताबिक हाईकोर्ट ने 16 अप्रैल 2026 को चार सप्ताह के भीतर संबंधित आदेशों को लागू करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट में यूनियन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गायत्री सिंह और सुधा भारद्वाज ने कर्मचारियों का पक्ष रखा।

मेधा पाटकर का फॉलोअप

यूनियन अध्यक्ष मेधा पाटकर द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ किए गए लगातार पत्राचार और फॉलोअप के बाद भुगतान का रास्ता साफ हुआ। यूनियन के उपाध्यक्ष डॉ. संजय मंगला गोपाल ने कहा कि 6 महीने की बकाया राशि मिलने के बाद कर्मचारियों को राहत मिली है। हालांकि, स्थायी काम में ठेका प्रथा खत्म करना, उचित वेतन और भत्ते दिलाना जैसे मुद्दे अभी बाकी हैं और इनके लिए संघर्ष जारी रहेगा।

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