संजय राउत ने ठाणे में प्रस्तावित अमेजन डेटा सेंटर का विरोध किया।
संजय राउत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा।
बिना स्थानीय नागरिकों की सहमति के प्रोजेक्ट थोपने का आरोप।
राउत ने पानी-बिजली खपत की चिंताओं को रेखांकित किया।
Sanjay Raut Letter To Devendra Fadnavis: महाराष्ट्र के ठाणे के रिहायशी इलाके में प्रस्तावित अमेजन डेटा सेंटर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) नेता और सांसद संजय राउत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर इस परियोजना का कड़ा विरोध जताया है। राउत ने पत्र में आरोप लगाया है कि ठाणे के एक घने आबादी वाले रिहायशी इलाके की 54 एकड़ जमीन पर स्थानीय निवासियों से बिना किसी सलाह-मशविरे के यह प्रोजेक्ट थोपा जा रहा है।
संजय राउत ने पत्र में लिखा कि यह मुद्दा अब केवल तकनीकी या औद्योगिक निवेश का नहीं रह गया है, बल्कि यह ठाणे के नागरिकों के दैनिक जीवन, जनस्वास्थ्य और सुरक्षा से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने खुलासा किया कि इस प्रोजेक्ट के खिलाफ आवाज उठाने वाले स्थानीय लोगों को डराया-धमकाया जा रहा है। राउत ने निशाना साधते हुए कहा कि ठाणे के कुछ कुख्यात नेता अपने निजी स्वार्थों को साधने के लिए नागरिकों के भविष्य को दांव पर लगा रहे हैं।
संजय राउत ने अपने पत्र में अमेरिका के हालिया उदाहरणों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुंबई यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री को इस वैश्विक मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए थी। अमेरिका में 60 से 75 प्रतिशत आबादी रिहायशी इलाकों में नए डेटा सेंटर स्थापित करने के खिलाफ है। न्यूयॉर्क में बड़े डेटा सेंटरों पर अस्थायी रोक लगाई गई है, वहीं टेक्सास जैसे राज्यों में ग्रिड कनेक्शन और परमिट रोके गए हैं।
संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में पहले से ही सूखे जैसे हालात बने रहते हैं, ऐसे में डेटा सेंटरों को ठंडा रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले लाखों गैलन पानी और अत्यधिक बिजली आपूर्ति पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने अपने पत्र में दावा किया कि यह डेटा सेंटर स्थानीय स्तर पर पानी और बिजली की आपूर्ति, साथ ही जनस्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है। इसका ठाणे के लोगों के दैनिक जीवन पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।
ठाणे नगर निगम, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, संबंधित बिजली वितरण कंपनी, जल आपूर्ति प्राधिकरण और परियोजना प्रमोटरों की एक संयुक्त बैठक बुलाई जानी चाहिए, जिसमें स्थानीय नागरिकों के प्रतिनिधि भी शामिल हों।
अमेजन डेटा सेंटर परियोजना के लिए दी गई निर्माण, जल आपूर्ति, बिजली आपूर्ति, पेड़ों की कटाई और पर्यावरणीय परमिटों से जुड़ी सभी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि वर्तमान में कौन से परमिट कानूनी रूप से वैध हैं।
परियोजना में रोजाना और अधिकतम समय में कितना पानी इस्तेमाल होगा, पानी के स्रोत क्या होंगे, रीसाइक्लिंग की दर क्या होगी और कूलिंग के लिए कौन सी तकनीक इस्तेमाल की जाएगी, इन सब की जांच स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा कराई जानी चाहिए। यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पानी-मुक्त कूलिंग के दावे में वास्तव में कौन सी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
परियोजना की अधिकतम बिजली की मांग, स्वतंत्र बिजली आपूर्ति के इंतजाम और स्थानीय बिजली वितरण ग्रिड पर पड़ने वाले संभावित असर की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही, यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करने का खर्च कौन उठाएगा।
आस-पास की रिहायशी इमारतों पर शोर और वायु प्रदूषण के संभावित असर का आकलन किया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बैकअप जनरेटर, कूलिंग सिस्टम और निर्माण कार्यों से होने वाला प्रदूषण तय सीमाओं के भीतर ही रहे।
एक खुली जनसुनवाई आयोजित की जानी चाहिए, जिसमें डेटा सेंटर परियोजना प्रमोटर और संबंधित अधिकारी नागरिकों द्वारा उठाए गए सवालों का सीधा जवाब दे सकें। बैठक का विवरण, दिए गए आश्वासन और उन वादों को पूरा करने की समय-सीमा को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
यदि परमिट की शर्तों का कोई उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमों के अनुसार संबंधित परियोजना पर प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए; ज़रूरी सुधार पूरे होने के बाद ही आगे की कार्यवाही की अनुमति दी जानी चाहिए।
महाराष्ट्र में डेटा सेंटरों के लिए राज्य-स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए जाने चाहिए, जिनमें पानी के इस्तेमाल, बिजली की खपत, शोर के स्तर, उत्सर्जन और रिहायशी इलाकों पर पड़ने वाले असर जैसे पहलुओं को शामिल किया जाए। इसके अलावा, इस बात का भी गंभीरता से मूल्यांकन किया जाना चाहिए कि क्या वर्तमान में ऐसे डेटा सेंटरों की वास्तव में कोई ज़रूरत है। तब तक, ठाणे में डेटा सेंटर परियोजना पर रोक लगा दी जानी चाहिए।