मीरा-भाईंदर महानगरपालिका सोर्स: सोशल मीडिया
ठाणे

मीरा-भाईंदर मनपा में सेवा नियमों का प्रस्ताव दोबारा खारिज, प्रमोशन का इंतजार बढ़ा, कर्मचारियों में भारी आक्रोश

Proposal On Service Rules Rejected By MBMC: मीरा-भाईंदर मनपा में सेवा नियमों में बदलाव का प्रशासन का प्रस्ताव महासभा में फिर से खारिज कर दिया गया है। इससे कर्मचारियों का गुस्सा खुलकर सामने आया है।

वेदांत जोशी

MBMC Service Rules: मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के सैकड़ों कर्मचारियों के करियर को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। प्रशासन की ओर से सेवा प्रवेश नियमों में संशोधन के लिए लाया गया महत्वपूर्ण प्रस्ताव महासभा में पूरी तरह ठंडे बस्ते में चला गया है। सदन में सत्तारूढ़ दल भाजपा ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया, जिसके बाद से ही मनपा के प्रशासनिक गलियारों में कर्मचारियों का गुस्सा और असंतोष खुलकर सामने आने लगा है।

सालों से एक ही पद पर अटके हैं कर्मचारी

इस फैसले ने उन कर्मचारियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है जो पिछले कई सालों से एक ही टेबल पर काम कर रहे हैं। महानगर पालिका के भीतर लिपिकीय और तृतीय श्रेणी के पदों पर बैठे कर्मचारी लंबे समय से अपनी पदोन्नति की राह देख रहे हैं।

नियमानुसार आवश्यक सेवा अवधि पूरी करने के बावजूद उन्हें वरिष्ठ पदों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विडंबना यह है कि विभाग के कई कर्मचारी तो प्रमोशन का इंतजार करते-करते ही रिटायर्ड हो चुके हैं, लेकिन उनके सेवाकाल में उन्हें जायज हक नहीं मिल सका।

पक्षपात के आरोपों के चलते रुका प्रस्ताव

ऐसा नहीं है कि यह प्रस्ताव पहली बार आया था। प्रशासन ने इससे पहले जुलाई में भी इसे सदन के पटल पर रखा था, लेकिन तब पदोन्नति प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं की शिकायत कर इस पर विस्तृत रिपोर्ट मांग ली गई थी।

उपमहापौर ध्रुवकिशोर पाटिल ने इस बार प्रस्ताव खारिज होने की मुख्य वजह बताते हुए कहा कि कुछ पार्षदों और कर्मचारियों की तरफ से शिकायतें मिली थीं कि इस नए बदलाव से कुछ विशेष लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इसी के चलते पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रस्ताव को दोबारा नामंजूर कर दिया गया।

व्यापक बदलाव के बाद फिर होगा पेश

बार-बार प्रस्ताव लटकने से पैदा हुए भारी असंतोष को देखते हुए अब प्रशासन इस पर फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। उपमहापौर के अनुसार, अब इस पूरे मसौदे का गहन अध्ययन किया जाएगा। इसमें सभी जरूरी कानूनी सुधार और व्यापक प्रावधान जोड़े जाएंगे ताकि किसी भी स्तर पर पक्षपात न हो सके।

इन सुधारों के बाद इस प्रस्ताव को एक बार फिर मंजूरी के लिए महासभा के सामने लाया जाएगा, हालांकि तब तक कर्मचारियों को अपनी तरक्की के लिए और लंबा इंतजार करना होगा। कर्मचारियों इंतजार कितना लंबा होगा ये अभी कहना जरा मुश्किल है।

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