मुंब्रा देवी मंदिर (सोर्स: सोशल मीडिया) 
ठाणे

780 सीढ़ियां और 1250 फीट की ऊंचाई, मुंब्रा देवी मंदिर में विराजमान है 9 देवियों का अद्भुत रूप, जानें महिमा

Chaitra Navratri 2026: ठाणे के मुंब्रा स्टेशन के पास पहाड़ी पर स्थित मुंब्रा देवी मंदिर में चैत्र नवरात्रि का उत्सव शुरू हो गया। यहां की स्वयंभू मूर्ति के अलौकिक दर्शन मात्र से मुरादें पूरी होती हैं।

आकाश मसने

Mumbra Devi Temple: गुड़ी पड़वा से चैत्र नवरात्रि का त्योहार 19 मार्च से शुरू हो गया है। गुड़ी पड़वा के एक दिन पूर्व रात्रि में दुर्गा माता मंदिरों में अभिषेक होता है। उसके बाद मंत्रोच्चार के बाद विधि-विधान से पूजा पाठ कर सजावट की जाती है। जो दिव्य व अलौकिक दिखती है। मध्य रेलवे के मुंब्रा स्टेशन के पास पहाड़ पर मां मुंब्रा देवी का भव्य मंदिर है। यह प्राचीन मंदिर अंग्रेजों के समय का है। तकरीबन 70 से 80 साल पुरानी स्वयंभू मूर्ति है। इसकी ऊंचाई करीब 1250 फीट है।

कहा जाता है कि यहां पर आने वाले लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वैसे प्रति दिन 150 से 200 दर्शनार्थी यहां आते हैं। वहीं नवरात्रि के दौरान भक्तों की संख्या हजारों में पहुंच जाती है। इस मंदिर की देखरेख स्व. नाना भगत तथा राम चन्द्र भगत वर्षों से करते आ रहे थे। अब उनकी अनुपस्थिति में उनका परिवार सेवा कर रहा है।

मंदिर की देखरेख कर रहे मोहन भगत ने बताया कि मुंना देवी मंदिर के अंदर एक मुंब्रा देवी की मूर्ति है तथा उसके नीचे नवदुर्गा की नवरूप वाली मूर्ति है। समूचे महाराष्ट्र में इस प्रकार के अद्भुत नवदुर्गा की मूर्ति कहीं भी देखने को नहीं मिलेगी। मूर्ति के ठीक बगल में मां मुंब्रादेवी के भाई गवली दादा की मूर्ति है।

मंदिर में मनाया जाता है नवरात्रि का उत्सव

मुंद्रा देवी मंदिर में नवरात्रि के नौ दिनों तक उत्सव रहता है। मुंब्रा देवी मंदिर की विशेषता यह कि यहां पर मांगी गई हर मुराद मां पूरी करती है। यदि किसी के पुत्र आदि न होते हों तो मां का दर्शन कर मन्नत मांगने से मां उनकी झोली खुशियों से भर देती हैं। ऐसा लोगों का मानना है।

कहां है मुंब्रा देवी मंदिर?

मुंब्रा देवी मंदिर पर जाने के लिए बीच पहाड़ एवं जंगल के रास्ते से गुजरना पड़ता है। इसमें करीब 780 सीढ़ियां बनी हुई है और यह मंदिर 1250 फीट ऊपर है। मंदिर में जाते समय बीच रास्ते में एक सातेश्रा देवी मंदिर पड़ता है। सातेश्रा मां के मंदिर के नीचे से ही झरने का पानी बहते रहता है। सबसे बड़ी बात यह है कि सुबह के समय निकली हुई पहली किरण मां के पैरों को स्पर्श करती है। यहां के स्थानीय लोगों में उस समय आस्था जागी, जब सबकी मंदिर पर एक जलता हुआ लौ दिखाई दिया।

पुजारी पंडित दिवाकर द्विवेदी ने बताया नवरात्रि के 9 दिन मंदिर में खूब चहल पहल रहती है। यहां नवरात्रि में प्रतिदिन हजारों भक्त रोजाना मां मुंब्रा देवी के दर्शन करने और आशीर्वाद लेने आते हैं। भक्त सच्चे दिल से जो भी मन्नतें मांगते है, वह माता रानी पूरी करती हैं। मैं पिछले 14 सालों से मंदिर में सेवारत हूं। वहीं ट्रस्टी मोहन रामचंद्र भगत ने कहा कि यह मंदिर साल पुराना है। पहले मेरे दादाजी उसके बाद पिता जी और मैं और हमारा परिवार सेवा कर रहा है। पिछली 3 पीढ़ियों से हम मंदिर की देखभाल करते आ रहे है।

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