मीरा भाईंदर मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया) 
ठाणे

टैक्स बढ़ोतरी से नागरिकों पर बोझ! मीरा-भाईंदर मनपा के फैसले पर विपक्ष का हमला

Mira Bhayandar में प्रॉपर्टी टैक्स में 60-66% तक बढ़ोतरी के फैसले ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष ने इसे जनता पर बोझ बताया, जबकि भाजपा का दावा है कि यह केवल नई प्रॉपर्टी पर लागू होगा।

अपूर्वा नायक

Mira Bhayandar Property Tax Hike 2026: नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ मीरा भाईंदर के नागरिकों पर टैक्स का भारी बोझ बढ़ने जा रहा है। मनपा द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स में 60 से 66 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी के फैसले ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।

विपक्ष ने इसे 'जनता पर सीधा आर्थिक हमला' बताया है। जबकि सत्तापक्ष भाजपा का कहना है कि यह वृद्धि सिर्फ नये प्रॉपर्टी पर लागू होगी। इस टैक्स वृद्धि के प्रस्ताव को रद्द करने की मांग विपक्ष सहित सत्ता पक्ष की नगरसेविका नीला सॉस ने भी राज्य सरकार से की है।

भाजपा ने कहा, वृद्धि सिर्फ नये प्रॉपर्टी पर लागू होगी

टैक्स बढ़ोतरी का मुद्दा अब बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है। जहां एक ओर प्रशासन इसे राजस्व बढ़ाने की जरूरत बता रहा है, वहीं विपक्ष और नागरिक इसे आर्थिक बोझ और मनमानी करार दे रहे हैं। आने वाले समय में इस मुद्दे पर और तीखी सियासत देखने को मिल सकती है।

बता दें कि मीरा-भाईंदर शहर में 1 अप्रैल 2026 से प्रॉपर्टी टैक्स की दरों में भारी बढ़ोतरी लागू होगी। मनपा में सत्ताधारी भाजपा ने टैक्सेबल वैल्यू रेट में 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी का प्रस्ताव पारित किया है, जिससे कुल टैक्स बोझ 66 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

इस फैसले का असर सिर्फ प्रॉपर्टी टैक्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रोड टैक्स, पानी आपूर्ति कर, सीवेज टैक्स, ट्री टैक्स, एजुकेशन टैक्स और फायर टैक्स जैसे अन्य करों में भी बढ़ोतरी होगी, कांग्रेस के नगरसेवक व गुट नेता जय ठाकुर ने आरोप लगाया कि भाजपा ने बहुमत के दम पर नियमों की अनदेखी करते हुए यह प्रस्ताव पास किया और नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ डाला। वहीं, मनसे शहर अध्यक्ष संदीप राणे ने कहा कि भाजपा नागरिकों और व्यापारियों पर आरोप लगाया कि पहले भी पानी दर, कचरा टैक्स और अन्य शुल्क बढ़ाकर जनता पर बोझ डाला गया है।

शिवसेना ने फैसले को बताया गैर कानूनी

आम आदमी पार्टी के नेता सुखदेव बिनबेसी ने मनपा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारी टैक्स वसूली के बावजूद नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं और शहर की स्थिति बदतर होती जा रही है। शिवसेना (शिंदे गुट) ने भी इस फैसले का विरोध करते हुए इसे गैर कानूनी बताया और प्रस्ताव को रद्द करने की मांग की।

शहर में चल रहे रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के चलते नई इमारतों में शिफ्ट होने वाले नागरिकों, झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास योजनाओं के लाभार्थियों और छोटे व्यापारियों पर इस बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ेगा। भाजपा का कहना है कि यह बढ़ोतरी केवल उन नई प्रॉपर्टीज पर लागू होगी, जिन पर 1 अप्रैल के बाद टैक्स लगेगा, हालांकि विपक्ष इसे भ्रामक बता रहा है।

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