BSUP परियोजना प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मीडिया)  
ठाणे

15 साल से अधूरी BSUP परियोजना पर सरकार गंभीर, 3,662 परिवारों को राहत की उम्मीद, PPP मॉडल से होगा निर्माण

Mira Bhayandar BSUP: मीरा भाईंदर में 15 वर्षों से लंबित बीएसयूपी आवास योजना पीपीपी मॉडल से पूरी होगी। विधानसभा में मंत्री माधुरी मिसाल ने मनपा का प्रस्ताव मिलते ही 8 दिन में मंजूरी का दिया भरोसा।

रूपम सिंह

Mira Bhayandar BSUP Narendra Mehta: मीरा भाईंदर में पिछले 15 वर्षों से धनाभाव के कारण अधर में लटकी बीएसयूपी (बेसिक सर्विसेज फॉर अर्बन पुअर) आवास योजना को अब पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के जरिए पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है।

गुरुवार को महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में विधायक नरेंद्र मेहता ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से यह मुद्दा सदन में उठाया। इस पर नगर विकास विभाग की ओर से राज्यमंत्री माधुरी मिसाल ने सदन में आश्वासन दिया कि जिन निर्माणाधीन स्ट्रक्चर को पीपीपी मॉडल के तहत विकसित किया जाना है, उनका प्रस्ताव महानगरपालिका प्रस्तुत करे, तो आठ दिनों के भीतर अनुमति प्रदान कर दी जाएगी।

इससे पहले परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक भी बीएसयूपी की अधूरी परियोजना को पीपीपी मॉडल से पूरा करने की मांग कर चुके हैं और इस संबंध में अधिकारियों के साथ कई बैठकें भी हुई थीं। हालांकि अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया था। सदन में मामला उठने के बाद अब योजना के निर्णायक समाधान की उम्मीद बढ़ गई है।

3,662 परिवार अब भी ट्रांजिट कैंपों में

वर्ष 2015 में केंद्र सरकार द्वारा बीएसयूपी योजना बंद किए जाने के बाद निर्माण कार्य ठप पड़ गया। बाद में महानगरपालिका ने ऋण लेकर जनता नगर की दो इमारतों का निर्माण पूरा कराया और 474 लाभार्थियों को आवास सौपे। लेकिन शेष इमारतों का निर्माण अब भी बेहद धीमी गति से चल रहा है। इसके कारण करीब 3,662 परिवार पिछले 15 वर्षों से ट्रांजिट कैंपों में बदहाल परिस्थितियों में रहने को मजबूर है।

4,136 परिवारों के लिए बनने थे पक्के मकान

केंद्र सरकार ने वर्ष 2009 में झुग्गीवासियों के जीवन स्तर में सुधार के उद्देश्य से बीएसयूपी योजना शुरू की थी। वर्ष 2011 में काशीमीरा के जनता नगर और काशी चर्च झोपडपट्टी क्षेत्र के निवासियों को पक्के मकान उपलब्ध कराने के लिए यह परियोजना स्वीकृत हुई।

करीब 330 करोड़ रुपए की इस योजना में 50% राशि केंद्र सरकार, 30% राज्य सरकार, 9% मीरा भाईंदर महानगरपालिका और 11% लाभार्थियों के अंशदान का प्रावधान था। लाभार्थियों के चयन और दस्तावेजों की जांच का कार्य दो निजी एजेंसियों को सौपा गया था। योजना के तहत 4, 136 झोपड़पट्टीवासियों को पात्र घोषित किया गया था।

फर्जी लाभार्थियों की जांच रिपोर्ट दो साल से लंबित, पारदर्शिता पर सवाल

बीएसयूपी योजना में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाभार्थी बनने के आरोपों की जांच के लिए वर्ष 2023 में तत्कालीन मीरा भाईंदर मनपा आयुक्त एवं प्रशासक दिलीप ढोले ने 9 सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति को जांच कर रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन अब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो सकी है, जिससे योजना की पारदर्शिता पर भी सवाल बने हुए है।।

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