मंत्री नरहरि झिरवाल ने नियमों के उल्लंघन पर चार अधिकारियों को निलंबित किया।
प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों के खिलाफ की गई कार्रवाई में गंभीर प्रक्रियात्मक कमियां पाई गईं।
राज्य सरकार ने कुल पच्चीस अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय जांच शुरू की।
Minister Narhari Zirwal Suspends Maharashtra FDA Officials: महाराष्ट्र के FDA विभाग में प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों के खिलाफ की गई प्रवर्तन कार्रवाइयों में गंभीर प्रक्रियात्मक कमियों, क्षेत्राधिकार के अतिक्रमण और प्रशासनिक नियमों की अनदेखी के आरोप में राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।
अन्न एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि जिरवाल ने 4 उच्च अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और 21 अन्य अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने की आधिकारिक घोषणा की है। इस प्रकार, पूरे प्रकरण में कुल 25 अधिकारी दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में आए हैं।
30 अक्टूबर 2026 को जारी किए गए सरकारी आदेश के अनुसार निलंबित किए गए चार अधिकारियों में शामिल हैं।
दिगंबर भोगावडे (अन्न सह आयुक्त)
यदुराज दहातोंडे (अन्न सहायक आयुक्त)
अशोक इलागेर (अन्न सुरक्षा अधिकारी)
सी. आर. स्वामी (अन्न सुरक्षा अधिकारी)
इन अधिकारियों के खिलाफ महाराष्ट्र नागरिक सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1979 के नियम 8 के तहत औपचारिक विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यह पूरी गाज ठाणे स्थित मेसर्स हाई स्ट्रीट इम्पेक्स एलएलपी और पुणे जिले के मावल तालुका स्थित मेसर्स सोएक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मामलों की आंतरिक जांच के बाद गिरी है। एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के जरिए कराई गई जांच में अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई में कई गंभीर खामियां उजागर हुईं।
कंपनी के उत्पाद पर स्पष्ट रूप से दर्ज था कि नॉट फॉर एडिबल यूज़ / ओनली फॉर यूज़ इन हुक्का फॉर स्मोकिंग पर्पस। इसके बावजूद अन्न सुरक्षा कानून के तहत अनुचित कार्रवाई की गई।
जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस कार्रवाई के लिए सहायक आयुक्त पी. पी. सूर्यवंशी सहित अन्य अधिकारियों पर दबाव डाला गया था। जब सूर्यवंशी ने इस गैर-कानूनी कार्रवाई से इनकार किया, तो उन्हें उल्टे कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया था।
2 जनवरी 2026 को एफडीए के विशेष उड़न दस्ते ने मावल के टाकवे स्थित सोएक्स इंडिया प्रा. लि. पर छापा मारा था। इस दौरान 5,48,488 किलोग्राम वजन का प्रतिबंधित तंबाकूजन्य स्टॉक जप्त किया गया था, जिसकी अनुमानित कीमत 31.67 करोड़ रुपये से अधिक थी और प्रतिष्ठान को सील कर दिया गया था।
हालांकि, इस कार्रवाई में क्षेत्राधिकार के उल्लंघन और कानूनी नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया।
एफडीए मंत्री नरहरि जिरवाल ने स्पष्ट किया कि अन्न सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करना और प्रशासनिक जवाबदेही तय करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस सख्त कदम से पूरे महकमे में यह कड़ा संदेश दिया गया है कि प्रवर्तन कार्रवाइयों में किसी भी प्रकार की मनमानी या प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।