कल्याण : गुटबाजी (Groupism) के चलते कई गुटों में बंटी कांग्रेस पार्टी (Congress Party) कल्याण-डोंबिवली (Kalyan-Dombivli) में सबसे बूरे दौर से गुजर रही है, हालत यह है कि पिछले चुनाव (Election) में 122 नगरसेवकों वाली कल्याण डोंबिवली नगर निगम में मात्र 4 नगरसेवक ही चुने गए थे। कमजोर और निष्क्रिय जिला नेतृत्व के कारण कल्याण-डोंबिवली में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टी का संगठन विलुप्त हो चुका है। यहां जो भी नगरसेवक चुनकर आते हैं, वह अपने दम पर ही चुनाव जीतते हैं, हालत यह है कि तिलक चौक में डेढ़ दशक पहले पार्टी का जिला कार्यालय तोड़कर नया जिला कार्यालय बनाने की पहल तत्कालीन जिला अध्यक्ष डॉ.आर. बी. सिंह ने की थी वो अब तक नहीं बन पाया है, पार्टी जनसंपर्क कार्यालय नहीं होने से जिला कमेटी की सालों से मीटिंग नही हो पाई है।
जनसंपर्क के अभाव में पार्टी संगठन समाप्त होने की कगार पर है। कल्याण डोंबिवली महानगरपालिका में कांग्रेस पार्टी के प्रदर्शन की बात करें तो 1 अक्टूबर 1983 में अस्तित्व में आई कल्याण महानगरपालिका का कई कानूनी अड़चनों के चलते पहला आम चुनाव 10 सितंबर 1995 में हुआ और 96 वार्डों वाली महानगरपालिका में कांग्रेस के 16 नगरसेवक चुनकर आए थे, और 24 सितंबर साल 2000 में हुए चुनाव कुल 96 वार्डो वाली महानगरपालिका में 18 नगरसेवक चुने गए थे, जबकि कांग्रेस से टूटकर शरद पवार के नेतृत्व में बनी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 10 नगरसेवक चुनकर महानगरपालिका सदन में पहुंचे थे।
23 अक्टूबर 2005 में हुए कल्याण डोंबिवली नगर निगम के कुल 107 वार्डो में 21 नगरसेवक कांग्रेस के और 23 नगरसेवक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के चुनकर आये और दोनों कांग्रेस ने मिलकर महानगरपालिका की सत्ता पर कब्जा कर लिया और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के पुंडलिक महात्रे महापौर और कांग्रेस के पंडित भोईर उप महापौर बने उस समय कांग्रेस के जिला अध्यक्ष डॉ. आर. बी. सिंह थे और जब पार्टी की गुटबाजी के चलते डॉ. आर. बी. सिंह को जिला अध्यक्ष पद से हटाया गया और जयनारायण मुन्ना पंडित को जिला अध्यक्ष बनाया गया।
उसके बाद 31 अक्टूबर 2010 हुए महानगरपालिका के 107 वार्डो में कांग्रेस के 15 नगरसेवक चुनकर आये और उसके बाद तो कांग्रेस का संगठन बिखर सा गया, दमखम और जनाधार रखने वाले पदाधिकारी पार्टी की गुटबाजी देखते हुए कांग्रेस छोड़ कर दूसरी पार्टियों में चले गए और जयनारायण मुन्ना पंण्डित को हटा कर कांग्रेस नेता संजय दत्त की पहल पर सचिन पोटे को जिला अध्यक्ष बनाया गया जिसके बाद पार्टी का संगठन ही शिथिल हो गया और उसका नतीजा यह रहा कि 1 नवंबर 2015 को हुए महानगरपालिका के कुल 122 वार्डो में कांग्रेस के मात्र 4 नगरसेवक ही चुनकर नगरसेवक बन सके और बाकी वार्डो में कांग्रेस को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा।
जानकारों का कहना है कि जबतक प्रदेश नेतृत्व द्वारा हवाहवाई और चापलूस पदाधिकारियों को हटाकर जमीन से जुड़े किसी मजबूत जनाधार वाले कांग्रेसी को जिला अध्यक्ष नहीं बनाती है और संगठन मजबूत नही किया जाता तबतक यही हाल रहने वाला है। कल्याण डोंबिवली कांग्रेस में इस कदर गुटबाजी है कि इसका नजारा उस समय देखने को मिला।
जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले कल्याण में सदभावना यात्रा में शामिल होने आए तो उनके सामने ही कल्याण जिला कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष संकेत लोके, कल्याण शहर कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष लालचंद्र तिवारी, पदाधिकारी पांडेय और पूर्व नगरसेवक इफ्तेखार खान के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने कार्यक्रम का बहिष्कार कर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पोटे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की थी और कहा था कि पोटे हटाओ कांग्रेस बचाओ का नारा देते हुए सचिन पोटे को जिला अध्यक्ष पद से हटाने की पुरजोर मांग की थी, हालांकि संजय दत्त, डॉ. आर.बी. सिंह, और प्रकाश मुथा आदि कई गुटों में बंटी कल्याण कांग्रेस का कोई नेता गुटबाजी के बारे में खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं है।