KDMC Fake Fire NOC Bribery Case: केडीएमसी के रिश्वत कांड ने अब बड़ा रूप ले लिया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की कार्रवाई के बाद क्लर्क भरत पाटोले के गोरखधंधे को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।
जांच में पता चला है कि पाटोले पिछले करीब साढ़े तीन साल से फर्जी फायर एनओसी जारी कर रहा था। जानकारी के अनुसार, पाटोले पहले फायर ब्रिगेड विभाग में चपरासी के पद पर कार्यरत था। प्रमोशन मिलने के बाद वह क्लर्क बना और यहीं से फर्जीवाड़े का खेल शुरू हुआ।
अगस्त, 2022 में उसका तबादला मनपा मुख्यालय में हो गया, इसके बावजूद उसने नकली सील और मुहर के जरिए डुप्लीकेट फायर एनओसी जारी करना जारी रखा। वह उन मामलों में भी एनओसी जारी कर रहा था, जिन्हें फायर विभाग पहले ही खारिज कर चुका था।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे मामले में कुछ फायर कॉन्ट्रैक्टर भी उसकी मदद कर रहे थे। ये लोग ऐसे मामलों में फर्जी एनओसी दिलवाकर मोटी रकम वसूलते थे, जहां वैध तरीके से मंजूरी मिलना संभव नहीं था।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब 30 अप्रैल की सुबह ठाणे एसीबी टीम ने कल्याण पूर्व से पाटोले को 40 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। उसने कल्याण पूर्व स्थित साई इंग्लिश स्कूल को फायर एनओसी देने के बदले यह रकम मांगी थी।
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सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पाटोले ने अब तक कितने लोगों को फर्जी एनओसी जारी की, इसकी पूरी जानकारी दमकल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी नहीं है। मनपा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पूरे मामले की गहन जांच की मांग की है, ताकि इस गोरखधंधे में शामिल अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकें। फिलहाल एसीबी की टीम पाटोले से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। इस खुलासे के बाद मनपा की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।