अलनीनो से कृषि उत्पादन पर संकट (सोर्स: AI)
ठाणे

रुला रहा अलनीनो: दलहन-गुड़-शक्कर के भाव आसमान पर, एथनॉल उत्पादन पर लग सकती है रोक!

El Nino Impact On Food Prices: अलनीनो और प्रतिकूल मौसम से कृषि उत्पादन पर अनिश्चितता बढ़ी है। दालों के दाम 200 रुपये किलो तक पहुंचने के बीच चीनी और गुड़ की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है।

सूर्यप्रकाश मिश्र, आलोक उमाकृष्ण

Highlights

  • तुवर, राजमा और उड़द जैसी दालों की कीमतें खुदरा बाजार में करीब 180 से 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने का दावा किया गया है।

  • सीमित थोक स्टॉक और गन्ने की पेराई शुरू होने को लेकर अनिश्चितता के बीच कीमतों पर नजर बनी हुई है।

  • एथनॉल उत्पादन और चीनी की उपलब्धता से जुड़े संभावित फैसले आगामी सीजन में बाजार की दिशा प्रभावित कर सकते हैं।

El Nino Impact In India: अलनीनो के प्रभाव से देश के कई राज्यों में कहीं सूखे जैसे हालात तो कहीं अत्यधिक बारिश और बाढ़ के कारण फसलों पर संकट गहराने लगा है। इसका असर दलहन, गन्ना, चीनी और गुड़ के बाजार पर दिखाई देने लगा है। बढ़ती कीमतों से किसान, व्यापारी और आम उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं।

कृषि उत्पादन को लेकर बनी अनिश्चितता

कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के उपाध्यक्ष एवं ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेश भाई ठक्कर ने कहा कि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और कृषि उत्पादन को लेकर बनी अनिश्चितता से खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। ठक्कर के अनुसार, तुवर, राजमा और उड़द जैसी दलहनी फसलों के भाव में तेजी आई है।

करीब तीन महीने पहले ये दालें खुदरा बाजार में 110 से 120 रुपये प्रति किलो मिल रही थीं, जबकि अब इनके दाम 90 से 100 रुपये प्रति आधा किलो यानी 180 से 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। इससे आम परिवारों के रसोई बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

चीनी और गुड़ की कीमतों में भी अगस्त के दूसरे पखवाड़े में तेजी दर्ज की गई थी। खुदरा बाजार में चीनी करीब 70 रुपये किलो और गुड़ 80 से 85 रुपये किलो तक पहुंच गया था। नया सीजन शुरू होने के बावजूद थोक मंडियों में गुड़ का सीमित स्टॉक और गन्ने की पेराई शुरू होने को लेकर अनिश्चितता से कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

30 लाख टन चीनी का कोटा जा

अक्टूबर के लिए केंद्र सरकार द्वारा लगभग 30 लाख टन चीनी का कोटा जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी, जिसमें करीब दो लाख टन आयातित चीनी शामिल होने की बात कही गई। इसी बीच, घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार आगामी 2026-27 एथनॉल आपूर्ति वर्ष में गन्ने के रस तथा ए और बी-हैवी शीरे से एथनॉल बनाने पर रोक लगाने की तैयारी कर रही है।

यह आपूर्ति वर्ष 1 नवंबर 2026 से 31 अक्टूबर 2027 तक चलेगा। हालांकि इस संबंध में अधिसूचना जारी होने पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एथनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली चीनी को घटाने के बाद देश का शुद्ध चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन रहा, जबकि घरेलू खपत लगभग 290 लाख टन आंकी जाती है।

ऐसे में चीनी की उपलब्धता और उत्पादन के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण के लिए देश में उत्पादित एथनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा मक्का, बाजरा और चावल जैसे अनाजों से तैयार किया जा रहा है।

गन्ने की पेराई पर नजर

आगामी सीजन में गन्ने के रकबे, चीनी उत्पादन और पेराई की शुरुआत पर बाजार की नजर रहेगी। इन कारकों के साथ सरकारी नीतियां तय करेंगी कि आने वाले महीनों में चीनी, गुड़ और दलहन की कीमतों को कितनी राहत मिल पाती है।

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