ठाणे स्टेशन पर बंद पड़ा ईएमआर (सोर्स: फाइल फोटो)  
ठाणे

रेलवे की बड़ी लापरवाही, पार्किंग ठेकेदारों के भरोसे यात्रियों की जान? 7 महीने बाद भी ठाणे-घाटकोपर में EMR बंद

Thane Station EMR: मध्य रेलवे के ठाणे, घाटकोपर और मुंब्रा जैसे स्टेशनों पर EMR सेवा ठप। पार्किंग ठेकेदारों को मिला मेडिकल सेंटर चलाने का ठेका, अनुभव की कमी से यात्रियों की जान खतरे में।

सूर्यप्रकाश मिश्र

Central Railway EMR News: मुंबई लोकल एवं अन्य यात्री ट्रेनों में सफर करने वाले लाखों यात्रियों को तत्काल चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के लिए मध्य व पश्चिम रेलवे के उपनगरीय स्टेशनों पर शुरू किए गए इमरजेंसी मेडिकल रूम (ईएमआर) बंद पड़े हुए हैं। यहां तक कि 7 माह पहले टेंडर फाइनल होने के बावजूद मध्य रेलवे के ठाणे, घाटकोपर, मुम्ब्रा जैसे बड़े स्टेशनों पर इमरजेंसी मेडिकल रूम शुरू नहीं हो पाए हैं। इससे आपात स्थिती में यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

10 स्टेशनों के लिए ईएमआर हुए थे मंजूर

मध्य रेल मुंबई मंडल के वाणिज्य विभाग ने मुंबई के 10 उपनगरीय स्टेशनों पर पिछले साल सितंबर अक्टूबर में ईएमआर मंजूर किया था। इनमें प्रमुख रूप से लोकमान्य तिलक टर्मिनस, कुर्ला, घाटकोपर, ठाणे, मुंब्रा, कलवा, टिटवाला, कर्जत मानखुर्द और चेंबूर के लिए भी ईएमआर मंजूर किए गए थे। इसका प्राथमिक उद्देश्य दुर्घटनाओं, बीमारियों या अन्य आपात स्थिति में यात्रियों व रेलवे कर्मचारी को को भी प्राथमिक उपचार मिल सके। भायखला, कल्याण और वाशी स्टेशनों पर ईएमआर पहले से ही शुर किए गए। घाटकोपर, ठाणे, मुंब्रा व चेम्बूर जैसे भीड़भाड़ वाले स्टेशनों पर मंजूरी के बावजूद इमरजेंसी मेडिकल रूम नहीं शुरू हो सके हैं।

7 माह बाद भी नहीं खुले ईएमआर

मध्य रेलवे के वाणिज्य विभाग द्वारा 7 माह पहले टेंडर मंजूर किए जाने के बाद ठाणे, घाटकोपर, मुम्ब्रा और चेम्बूर में ईएमआर शुरू न होने पर आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है। सूत्रों से पता चला है कि इन स्टेशनों पर ईएमआर चलाने का ठेका रेलवे में पार्किंग का ठेका लेने वाले उन ठेकेदारों को दे दिया गया है। जिन्हें आपात चिकित्सा केंद्र चलाने का कोई अनुभव नहीं है। उन कंपनियों को मेडिकल क्षेत्र का कोई अनुभव न होने से अब तक ड्रग लायसेंस भी नहीं मिला है।

दूसरी तरफ रेलवे के संबंधित अधिकारियों का कहना है कि उक्त स्टेशनों के लिए प्रक्रिया पूरी करने वाले टेंडरप्राप्त कंपनियों को जगह उपलब्ध करा दी गई है। ठेकेदारों ने यदि प्रक्रिया पूरी कर ली है,तो 7 महीने में ईमाआर क्यों नहीं शुरू कर सके। ऐसा सवाल उठ रहा है। पता चला है कि संबंधित ठेकेदार ने ठाणे, मुम्ब्रा, घाटकोपर और चेम्बूर स्टेशनों पर ईएमआर शुरू करने के लिए रेलवे से और समय मांगा है। रेलवे मामलों के जानकार एवं आरटीआई एक्टिविस्ट समीर जवेरी ने कहा कि 7 माह पहले टेंडर मिलने के बाद भी ईएमआर शुरू न हो पाना यात्रियों के साथ अन्याय है।

उन्होंने कहा कि रेलवे टेंडर देते वक्त कंपनी का प्रोफ़ाइल एवं अनुभव जरूर देखती है,यहां तक कि कैंटीन का ठेका देते वक्त भी खानपान क्षेत्र में 10 साल का अनुभव देखा जाता है। मेडिकल जैसी अत्यावश्यक एवं संवेदनशील सेवा देने वाली कंपनी का तो अनुभव जरूर देखा जाना चाहिए। उन्होंने इस मामले में आश्चर्य जताते हुए कहा कि उनके पत्र पर मुंबई मंडल के 44 स्टेशनों के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू होने जी जानकारी पहले ही दी गई थी।

ईएमआर में 24 घन्टे उपलब्ध सेवा

उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के निर्देश पर मुंबई के उपनगरीय स्टेशनों पर ईएमआर शुरू किए जाने का निर्णय लिया गया था। कोरोना के समय लगभग सभी ईएमआर बंद हो गए। उसके बाद यात्री संगठनों की मांग पर कुछ स्टेशनों पर शुरू हुए। मध्य रेल के दादर, परेल,कांजुरमार्ग,भांडुप,डोम्बिवली, कर्जत और वांगनी स्टेशनों पर ईएमआर के लिए टेंडर अलॉट किए गए हैं।

इन आपातकालीन चिकित्सा केंद्रों (ईएमआर) में जरूरी जीवन रक्षक उपकरण, ऑक्सीजन आपूर्ति, स्ट्रेचर और दवाइयां उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निजी चिकित्सा सेवा संस्थाओं की है। यहां योग्य डॉक्टरों और प्रशिक्षित पैरामेडिकल कर्मियों द्वारा चौबीसों घंटे सेवाएं प्रदान करने की जिम्मेदारी है। इसके साथ पोर्टेबल प्रयोगशाला,मेडिकल स्टोर और एम्बुलेंस सुविधा भी उपलब्ध करानी पड़ती है।

रोजाना होती हैं, दुर्घटनाएं

उल्लेखनीय है कि मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली मध्य व पश्चिम रेलवे की लोकल ट्रेनों से रोजाना लाखों लोग सफर करते हैं। ट्रेनों में भारी भीड़ एवं अन्य कारणों की वजह से रोजाना कई यात्री दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। उपनगरीय स्टेशनों पर आपातकालीन परिस्थिति में यात्रियों और रेल कर्मचारियों को भी तत्काल प्राथमिक उपलब्ध कराने यानी ईएमआर शुरू किए जाने की आवश्यक है।

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