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भिवंडी के शांतिसागर कॉम्प्लेक्स में दूषित जलापूर्ति के मामले में मनपा आयुक्त, संबंधित अधिकारियों और महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा गया है।
पाइपलाइन की मरम्मत और स्थायी समाधान होने तक प्रभावित परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना होगा।
संयुक्त समिति को जंग लगी और क्षतिग्रस्त GI पाइपलाइन मिली। कुछ पेयजल पाइपलाइनें खुले सीवेज के पानी में डूबी हुई पाई गईं।
Bhiwandi Municipal Corporation: भिवंडी में सीवर मिश्रित दूषित जलापूर्ति से नागरिकों की सेहत से हो रहे खिलवाड़ और उनके मूल अधिकारों से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। नारपोली क्षेत्र स्थित शांतिसागर कॉम्प्लेक्स की ‘एफ’ विंग के निवासियों को सीवर और मानव मल से दूषित पानी की आपूर्ति के मामले में पुणे के राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाते हुए मनपा आयुक्त,संबंधित अधिकारियों और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह (न्यायिक सदस्य) और डॉ. सुजीत कुमार बाजपेयी (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ मामले में मनपा आयुक्त व अन्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जब तक पाइपलाइनों की मरम्मत और स्वच्छ पानी का स्थायी समाधान नहीं होता तब तक संबंधित परिवारों को टैंकर से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। अगली सुनवाई 7 दिसंबर 2026 को होगी।
उल्लेखनीय है कि शांतिसागर कॉम्प्लेक्स ‘एफ’ विंग को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता आर. आर. त्रिपाठी ने एनजीटी के समक्ष याचिका दायर की थी। मामले में 2 सितंबर 2026 के अधिकरण के आदेश के बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) और जिला कलेक्टर के प्रतिनिधि की संयुक्त समिति ने मौके का निरीक्षण किया था।
समिति की रिपोर्ट में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की गंभीर खामियां सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम की ओर से बिछाई गई मुख्य गैल्वनाइज्ड आयरन (GI) पाइपलाइन जंग लगी, क्षतिग्रस्त और कई स्थानों पर टूटी हुई पाई गई। इससे भी गंभीर स्थिति यह थी कि विंग ‘ई’ और ‘एफ’ के बीच पेयजल आपूर्ति की पाइपलाइनें खुले और दुर्गंधयुक्त सीवेज के पानी में डूबी हुई थीं। इन परिस्थितियों में पेयजल लाइन में सीवर के दूषित पानी के प्रवेश की आशंका को समिति ने गंभीर माना और पाइपलाइनों को सीवर से अलग तथा सुरक्षित ऊंचाई पर स्थापित करने की सिफारिश की।
मामले का सबसे चिंताजनक पहलू पानी के नमूनों की प्रयोगशाला जांच है। याचिका में प्रस्तुत विवरण के अनुसार, MPCB की केंद्रीय प्रयोगशाला द्वारा सोसायटी के फ्लैटों से लिए गए पानी के नमूनों में 'टोटल कॉलिफॉर्म' और 'फीकल कॉलिफॉर्म' बैक्टीरिया की अधिक मात्रा पाई गई। 'फीकल कॉलिफॉर्म' की मौजूदगी पानी में मलजनित संदूषण का संकेत हो सकती है। ऐसे परिणाम पेयजल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए पानी को बिना उपयुक्त ट्रीटमेंट के पीने योग्य नहीं मानते। दूषित पानी की आपूर्ति जारी रहने पर निवासियों के स्वास्थ्य को खतरा खड़ा हो गया है।
संयुक्त समिति की रिपोर्ट में सोसायटी की आंतरिक ड्रेनेज व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए थे। इसके जवाब में आवेदक सोसायटी ने अपने प्रत्युत्तर में दावा किया कि नारपोली क्षेत्र में मनपा की ओर से भूमिगत मुख्य सीवर लाइन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।
सोसायटी का आरोप है कि निगम प्रत्येक फ्लैटधारक से जल-मल निस्सारण यानी ड्रेनेज सेस वसूलता है, लेकिन सेप्टिक टैंकों की नियमित सफाई के लिए वैक्यूम सक्शन टैंकर जैसी आवश्यक सुविधा उपलब्ध नहीं कराता। इसके कारण सेप्टिक टैंकों के ओवरफ्लो होने और गंदगी खुले में फैलने की समस्या पैदा होती है।
सोसायटी ने ठाणे जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) की उस रिपोर्ट पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें पानी को पीने योग्य बताया गया था। आवेदक का कहना है कि यह निष्कर्ष MPCB की प्रयोगशाला जांच में सामने आए मलजनित बैक्टीरिया के परिणामों से मेल नहीं खाता।
सोसायटी की ओर से एडवोकेट आर.आर. त्रिपाठी ने संबंधित रिपोर्ट की विश्वसनीयता और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष परीक्षण तथा जवाबदेही की मांग की है।
याचिकाकर्ता सोसायटी ने यह भी आरोप लगाया है कि समस्या के समाधान के बजाय उन पर दबाव डालते हुए मनपा ने शिकायतकर्ता सोसायटी को ही नोटिस जारी कर दिया। एनजीटी के समक्ष नोटिस रद्द करने की मांग भी की गई है। सोसायटी ने मनपा से 50 लाख रुपए मुवावजे की मांग भी की है। बताया गया कि भिवंडी मनपा क्षेत्र के अधिकांश इलाके में सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था ही नहीं है,इसकी वजह सीवेज लाइन का मलयुक्त दूषित पानी सड़कों सोसायटियों में बहता रहता है। इससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
एडवोकेट त्रिपाठी के अनुसार अधिकरण ने मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए भिवंडी निजामपुर मनपा आयुक्त, संबंधित मुख्य जल अभियंता, प्रभाग अधिकारियों और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किए हैं। संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा। सबसे अहम निर्देश यह है कि मनपा आयुक्त अगली सुनवाई तक शांतिसागर कॉम्प्लेक्स के प्रभावित निवासियों को टैंकरों के माध्यम से स्वच्छ एवं पीने योग्य पानी उपलब्ध कराएं। इससे पीड़ितों को काफी राहत मिलेगी। इससे पाइपलाइन की मरम्मत और स्थायी समाधान की प्रक्रिया पूरी होने तक परिवारों को सुरक्षित पानी मिलने की उम्मीद है।