Bhayandar Dongri Metro Car Shed Encroachment: भाईंदर पश्चिम में उत्तन के डोंगरी इलाके में प्रस्तावित मेट्रो कार शेड की जमीन एक बार फिर अतिक्रमण की गिरफ्त में है। करीब 59 हेक्टेयर (79 एकड़) सरकारी जमीन पर झुग्गी-झोपड़ियां दोबारा तेजी से बसने लगी हैं।
पहले की गई तोड़क कार्रवाई के बावजूद अतिक्रमण का लौटना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने अंधेरी-दहिसर से आगे भाईंदर तक मेट्रो विस्तार के तहत डोंगरी सर्वे नंबर 19 की भूखंड पर में कार शेड बनाने की योजना बनाई थी। यह भूखंड राजस्व विभाग से एमएमआरडीए को सौंप दी गई थी।
- टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी और ठेकेदार की नियुक्ति भी हो गई थी, लेकिन निर्माण शुरू होने से पहले ही भूमि और झुग्गी माफियाओं ने मौके का फायदा उठाकर जमीन पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया।
- मुआवजे के लालच में खड़ी हुई झोपड़ियां जानकारी के मुताबिक, मुआवजा पाने की उम्मीद में बड़ी संख्या में लोगों ने यहां झोपड़ियां बनाई। झोपड़ियों को नंबर दिए गए, निर्माण सामग्री लाने के लिए अस्थायी सड़क बनाई गई, बाकायदा सर्वे भी किया गया। इसके बावजूद संबंधित विभागों ने समय रहते कोई सख्त कदम नहीं उठाया था।
- स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों के विरोध के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चुनाव से पहले मेट्रो कार शेड को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की घोषणा की थी। हालांकि, अब तक इसकी कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है। इसी असमंजस का फायदा उठाकर अतिक्रमण माफिया फिर सक्रिय हो गए हैं।
झोपड़ी के नाम पर लाखों रुपये की हो रही वसूली
स्थानीय सूत्रों के अनुसार सर्वे रसीद के लिए प्रति झोपड़ी करीब 2 लाख रुपये, बिजली कनेक्शन के लिए करीब 1 लाख रुपये, झोपड़ियां 8-10 लाख रुपये में बेची जा रही थीं।
सितंबर 2025 को इस पूरे मामले का खुलासा होने के बाद मनपा ने कार्रवाई करते हुए कुछ झोपड़ियां हटाई, लेकिन यह कार्रवाई अधूरी ही रही। सरकारी जमीन पर कार्रवाई के बाद कुछ समय के लिए अतिक्रमण रुका, लेकिन अब फिर से झोपड़ियां बसनी शुरू हो गई हैं। वहीं, निजी जमीन पर बने अतिक्रमण अब भी जस के तस हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब किसी राजनीतिक संरक्षण में हो रहा है।
10 हजार पेड़ों को काटने की योजना
- इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 10 हजार पेड़ों को हटाने की योजना थी, जिसे लेकर पहले ही विरोध हो चुका है। अब अतिक्रमण के कारण पर्यावरण और शहरी विकास दोनों प्रभावित हो रहे है। स्थानीय निवासी गणेश पाटील का कहना है कि कार्रवाई सिर्फ दिखावे के लिए होती है। कुछ दिन बाद फिर वही हाल हो जाता है।
- पर्यावरण प्रेमी एड कृष्णा गुप्ता और हर्षद ढगे का आरोप है कि सरकारी जमीन पर खुलेआम कब्जा हो रहा है और जिम्मेदार विभाग चुप हैं। यह आश्चर्यजनक है, आखिर कार्रवाई के बाद भी अतिक्रमण कैसे लौट आया? क्या माफियाओं को संरक्षण मिल रहा है? और सबसे अहम है कि प्रशासन कब जागेगा? ऐसे सवाल फिलहाल अनुत्तरित हैं। डोंगरी की यह जमीन वर्तमान में योजनाओं से ज्यादा अव्यवस्था और अतिक्रमण की कहानी बनती जा रही है।
मीरा भाईंदर से नवभारत लाइव के लिए विनोद मिश्रा की रिपोर्ट