अंबरनाथ नगर परिषद (सोर्स: सोशल मीडिया) 
ठाणे

शिंदे के गढ़ अंबरनाथ में BJP का ‘कांग्रेस प्रयोग’ पड़ा भारी, दोनों दलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई

Thane: अंबरनाथ नगर परिषद में BJP-कांग्रेस गठबंधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया है। Fadnavis ने युति तोड़ने के आदेश दिए, वहीं कांग्रेस ने 12 पार्षदों समेत जिला इकाई को निलंबित कर दिया।

अपूर्वा नायक

Ambernath Municipal Corporation Election: महाराष्ट्र के अलावा देश की राजनीति में एक दूसरे के साथ छत्तीस का आंकड़ा रखने वाली बीजेपी ने अंबरनाथ नगर परिषद में कांग्रेस के साथ युति कर भूचाल मच गया है।

एक ओर सीएम देवेन्द्र फडणवीस ने भड़कते हुए अंबरनाथ में अपने नेताओं को तुरंत इस युति को तोड़ने का आदेश दिया है तो दूसरी तरफ महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के निर्देश पर अंबरनाथ में पार्टी के अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

साथ ही अंबरनाथ नगर परिषद में कांग्रेस के सभी निर्वाचित 12 पार्षदों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित किया गया है। सपकाल ने अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी को भंग करने का भी सख्त फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बीजेपी हमेशा से एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ती रही है। ऐसे में हमारे बीच गठबंधन का सवाल ही नहीं उठता है।

शिंदे को सत्ता से दूर रखने बीजेपी का खेला

हाल ही में अंबरनाथ नगर परिषद के चुनाव के नतीजे घोषित किए गए थे। यह इलाका डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे का गढ़ माना जाता है, उनके पुत्र श्रीकांत शिंदे यहां से सांसद है, अंबरनाथ नगर परिषद में कुल 60 वार्ड है। बहुमत का आंकड़ा हासिल करने के लिए 31 पार्षद की जरूरत थी। लेकिन शिंदे गुट सिर्फ 27 सीटें हासिल कर सकी जबकि बीजेपी को 14 वार्ड में सफलता मिली। कांग्रेस के 12 पार्षद चुन कर आए है। ऐसे में बीजेपी ने अपना नगराध्यक्ष बनाने के लिए शिंदे गुट के साथ खेला करते हुए अपने धुर विरोधी कांग्रेस के अलावा अन्य के साथ हाथ मिला लिया, लेकिन अब वह गठबंधन दोनों के लिए गले की फांस बन गई है।

यह सवाल बीजेपी से पूछो

श्रीकांत शिवसेना शिंदे गुट के सांसद श्रीकांत शिंदे ने पत्रकारों के सवाल पर कहा कि यह बीजेपी से पूछना चाहिए कि उन्होंने आखिर अवरनाथ में कांग्रेस के साथ गठबंधन क्यों किया है। मेरा मानना है कि बीजेपी के सीनियर नेताओं को इस पर कड़ी कारवाई करनी चाहिए, केंद्र व राज्य में हमारा बीजेपी के साथ गठबंधन है और यह बना रहना चाहिए।

इधर अकोट में MIM-BJP गठबंधन

एक और जहां अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी ने कांग्रेस से हाथ मिला कर सनसनी फैला दी। वहीं अकोला की अकोट नगर परिषद में सत्ता के लिए बीजेपी विपरीत विचारधारा रखने वाले असदुद्दीन ओवैसी की एमआईएम से हाथ मिला लिया है। 35 सीटों वाली इस नगर पालिका में 33 सीटों पर चुनाव हुए, जहां भाजपा 11 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर तो उभरी, लेकिन बहुमत के लिए आवश्यक पार्षद उनके पास नहीं थी, भाजपा की माया धुले ने मेयर का पद तो जीत लिया, लेकिन सदन चलाने के लिए उन्होंने 'अकोट विकास मंच' नाम से एक महागठबंधन तैयार किया। इस गठबंधन में ओसी की पार्टी के 5 पर्षद भी शामिल हैं। इससे भी सियासी तूफान मच गया है।

तुरंत तोड़ो गठबंधन

सीएम देवेंद्र फड़णवीस ने साफ किया हैं कि हमारी पहीं को कांग्रेस और एमआईएम के साथ गठबंधन मंजूर नहीं है। इस बारे में लोकल नेताओं ने जो फैसला किया है, उसे सुधारा जाएगा। मैंने इन युति को तुरंत तोड़ने के निर्देश दिए है, इस युति के लिए जिम्मेदार अंबरनाथ व अकोट नगर परिषद में चुने गए बीजेपी नेताओं अनुशासनात्मक कार्रवाई भी पर की जाएगी।

कारण बताओ नोटिस

अकोट में एमआईएम के साथ गठबंधन के बाद प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने पार्टी के विधायक प्रकाश भारसाखले को नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि इस तरह के फैसले से पाटी की इमेज डैमेज हुई है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी विधायक के खिलाफ सखा कार्रवाई की जा सकती है।

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